Varanasi Ropeway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के पुराने और बेहद भीड़-भाड़ वाले इलाकों में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से जल्द ही निजात मिलने की उम्मीद है. भारत का पहला पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोप-वे सिस्टम काशी रोप-वे (Kashi Ropeway) अब अपने अंतिम चरण में है और इसका करीब 95% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है.
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लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा ये प्रोजेक्ट न सिर्फ भारत, बल्कि एशिया का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोप-वे सिस्टम बनने जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, व्यापक ट्रायल रन पूरा होने के बाद, इस रोप-वे सेवा को इसी साल आम जनता के लिए शुरू किए जाने की उम्मीद है.
क्या है रूट और क्षमता?
- लंबाई: यह रोप-वे नेटवर्क करीब 4 किलोमीटर लंबा है.
- कनेक्टिविटी: यह वाराणसी कैंट (छावनी) रेलवे स्टेशन को शहर के चर्च स्क्वायर से सीधे जोड़ेगा.
- यात्रियों की संख्या: इस आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल केबल कार सिस्टम से रोजाना लगभग 96,000 यात्रियों के सफर करने की उम्मीद है.
स्थानीय लोगों में उत्साह
इस प्रोजेक्ट को लेकर वाराणसी के स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह है. लोगों ने इस पहल का दिल खोलकर स्वागत किया है. स्थानीय लोगों का मानना है कि शहर की तंग और व्यस्त गलियों में लगने वाले भीषण जाम से निपटने के लिए यह एक बेहद आधुनिक, प्रभावी और जरूरी कदम है.
रोप-वे न केवल लोगों का समय बचाएगा, बल्कि प्रदूषण मुक्त होने के कारण काशी की ऐतिहासिक गलियों को एक नया और आधुनिक रूप भी देगा.
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