वाराणसी के चर्चित ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद में सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुझाए गए मध्यस्थता (मिडिएशन) के प्रयास को बड़ा झटका लगा है. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मिडिएशन सेंटर में हुई पहली बैठक में न सिर्फ मुस्लिम पक्ष बल्कि हिंदू पक्ष ने भी मध्यस्थता से इनकार कर दिया. दोनों पक्ष कुछ ही देर में बैठक छोड़कर बाहर आ गए.
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मिडिएशन सेंटर में हुई थी बैठक
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया था. इसी के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) राजीव मुकुल पांडे की अध्यक्षता में मिडिएशन सेंटर के मनोरंजन कक्ष में बैठक आयोजित की गई थी. इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के प्रतिनिधि पहुंचे, लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी.
मुस्लिम पक्ष ने बताई यह वजह
मिडिएशन विफल होने के बाद अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता तौहीद खान ने कहा कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट से जुड़ा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने निर्देश दिया है कि जब तक इस मामले पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक ऐसे मामलों में मेरिट के आधार पर कोई नया निर्णय नहीं लिया जाए और न ही नए मामलों पर आगे बढ़ा जाए.
उन्होंने यह भी कहा कि मूल वाद 'लॉर्ड स्वयंभू बनाम इंतजामिया कमेटी' की पत्रावली भी अभी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में इस समय मध्यस्थता की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती.
हिंदू पक्ष ने भी किया साफ इनकार
वहीं हिंदू पक्ष के वकीलों, वादी महिलाओं और पैरोकारों ने भी मिडिएशन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि मंदिर के स्थान पर किसी भी तरह का दूसरा समाधान स्वीकार नहीं है. हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई (ASI) की सर्वे रिपोर्ट इस बात का बड़ा प्रमाण है कि वहां पहले मंदिर था. उनका कहना है कि जब उनके पास अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य हैं तो मध्यस्थता का कोई औचित्य नहीं है. उनका कहना है कि अब जो भी फैसला होगा, वह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर ही स्वीकार होगा.
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
मध्यस्थता की पहली कोशिश विफल होने के बाद अब एक बार फिर सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर टिक गई हैं. फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने कानूनी रुख पर कायम हैं और विवाद का समाधान अब न्यायिक प्रक्रिया से ही निकलता दिख रहा है.
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