Banarasi Yadav Encounter: यूपी पुलिस की गोलियों की आवाज से आज सुबह पूरा वारणसी दहल गया.यूपीएसटीएफ की टीम ने चर्चित बदमाश बनारसी यादव का एनकाउंटर कर फुल एंड फाइनल हिसाब कर दिया. बनारसी यादव ने वाराणसी के कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की सरेआम गोली मारकर हत्या की थी. इस हत्याकांड के बाद पुलिस 1 लाख के इनामी बदमाश बनारसी यादव की तलाश कर रही थी. एसटीएफ की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि बनारसी यादव वाराणसी-गाजीपुर हाईवे के रास्ते भागने की फिराक में है. बरियासनपुर के पास जब टीम ने उसे घेरकर सरेंडर करने को कहा तो उसने भागने के बजाय पुलिस पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. जवाबी फायरिंग में बनारसी को गोलियां लगीं.उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
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60 लाख की जमीन के लिए कराई गई थी महेंद्र गौतम की हत्या
वाराणसी के सारनाथ में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम के हत्याकांड की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. जांच में सामने आया कि कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या 29 बिस्वा जमीन के विवाद में हुई थी जिसकी कीमत ₹60 लाख थी. महेंद्र के परिचित जोगेंद्र यादव उर्फ फैटु ने हत्या की साजिश रची. इस दौरान जोगेंद्र यादव ने बनारसी यादव,अरविंद फौजी और विशाल नाम के तीन शूटरों को 2-2 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी.इस हत्या के लिए असलहा बिहार के मुंगेर के रहने मोहम्मद मुकीम ने उपलब्ध कराया था. इसके बाद बनारसी यादव ने अपने दो साथियों के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम को सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी और फिर फरार हो गए. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था. बताया जाता है कि कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के बाद यह कर्नाटक और मुंबई में छुपा हुआ था.4 जनवरी को बनारसी यादव का साथ देने वाले शूटर गाजीपुर के अरविंद यादव उर्फ फौजी को सारनाथ पुलिस और क्राइम ब्रांच ने एनकाउंटर में गिरफ्तार कर लिया था. वहीं गाजीपुर के ही तीसरे शूटर विशाल के लिए अभी भी पुलिस दबिश दे रही है.
कौन है बनारसी यादव
बनारसी यादव गाजीपुर के करंडा क्षेत्र के गौरहट गांव का रहने वाला था. उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 1 लाख रुपये का ईनाम घोषित कर रखा था.बनारसी के खिलाफ वाराणसी, गाजीपुर और सोनभद्र में कुल 21 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे. उसने महज 23 साल की उम्र में 3 हत्याएं और 5 से अधिक हत्या के प्रयास जैसी वारदातों को अंजाम दिया था. उसके जुर्म की शुरुआत साल 2003 में चोरी के मामले से हुई थी.2003 में पहली बार चोरी के इल्जाम में जेल गया था.
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