गाजियाबाद भारत सिटी सोसाइटी की नौवीं मंजिल से तीन सगी बहनों का एक साथ छलांग लगा देना क्या महज एक हादसा है? यह एक ऐसी उलझी हुई दास्तां है जिसकी हर कड़ी एक मोबाइल फोन पर आकर टिक जाती है. 3 फरवरी की उस काली रात को करीब 2 बजे जब सब सो रही थे तब इन तीन बहनों ने मौत को गले क्यों लगाया? इस सवाल का जवाब अब उन दो मोबाइल फोन्स में तलाशा जा रहा है जिन्हें पिता ने घटना से कुछ दिन पहले ही बेच दिया था.
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कंबल ओढ़ा, सोने का नाटक किया और फिर...
पिता के बयानों ने उस रात की खौफनाक टाइमलाइन सामने रखी है. शाम 7 बजे पिता ने बच्चियों से फोन छीन लिया था. लेकिन रात 11 बजे वे फिर से अपनी मां का फोन लेकर कमरे में चली गईं. रात करीब 1 बजे जब मां ने दोबारा उनसे फोन ले लिया, तो बच्चियों ने बड़ी चालाकी से कंबल ओढ़ लिया और सोने का नाटक करने लगीं.
किसी को अंदाजा नहीं था कि बंद कमरे के अंदर क्या खिचड़ी पक रही है. कुछ ही देर बाद जब मां को शक हुआ तो पता चला कि दरवाजा अंदर से लॉक है. पिता ने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. एक जोरदार आवाज आई और तीनों बहनें नीचे टीन शेड के पास लहूलुहान हालत में मिलीं.
बेचे गए मोबाइल और फॉरेंसिक रिपोर्ट का है इंतजार
पुलिस की जांच अब पूरी तरह डिजिटल साक्ष्यों पर केंद्रित है. पिता ने दो फोन बेच दिए थे. पहला फोन करीब 6-7 महीने पहले बेचा गया. दूसरा फोन घटना से महज 10 दिन पहले बेचा गया.
यूपी पुलिस अब इन दोनों फोन्स को रिकवर करने की कोशिश कर रही है. साथ ही, उस तीसरे फोन (मां का फोन) की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है जिसे बच्चियों ने मरने से ठीक पहले इस्तेमाल किया था. पुलिस यह जानना चाहती है कि आखिर उनकी सर्च हिस्ट्री क्या थी? वे इंटरनेट पर क्या ढूंढ रही थीं और क्या किसी के संपर्क में थीं?
पोस्टमॉर्टम और डायरी का रहस्य क्या है?
बच्चियों ने अपने सुसाइड नोट में मार खाने से बेहतर मर जाना लिखा था लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है. रिपोर्ट के मुताबिक मौत की वजह ऊंचाई से गिरने के कारण शॉक और हेमरेज है. शरीर पर चोट के कोई पुराने निशान नहीं मिले हैं. अब पुलिस उस डायरी की हैंडराइटिंग का मिलान कर रही है जिसका जिक्र सुसाइड नोट में किया गया था, ताकि यह पता चल सके कि असल में वह नोट किसने लिखा था.
इस मिस्ट्री में एक नाम देवू (सबसे छोटी बहन देशी) का भी है, लेकिन फिलहाल उसे किसी तरह से इन्फ्लुएंस किए जाने के सबूत नहीं मिले हैं. अब सारा दारोमदार उन मोबाइल फोन्स की डिजिटल रिपोर्ट पर है, जो शायद इस मिस्ट्री के आखिरी सच से पर्दा उठा सकें.
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