शादी में इंजीनियर प्रफुल्ल राणा ने लौटा दिया 21 लाख का शगुन फिर कही ऐसी बात जिसे सुन हर कोई हुआ इमोशनल

Saharanpur News: सहारनपुर के इंजीनियर प्रफुल्ल राणा ने अपनी शादी में दहेज के खिलाफ एक बड़ी मिसाल पेश की है. उन्होंने शादी के मंडप में वधू पक्ष द्वारा दिए जा रहे 21 लाख रुपये ससम्मान लौटा दिए और शगुन के तौर पर मात्र 1 रुपया स्वीकार किया.

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राहुल कुमार

• 11:31 AM • 17 Feb 2026

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Saharanpur News: शादी में गिफ्ट के नाम पर लड़की वालों से दहेज लेने की प्रथा कोई नई बात नहीं है. सालों से लोग शादी में लाखों रुपये दहेज के नाम पर मांगते आ रहे हैं. लेकिन आज भी समाज में कुछ ऐसे लोग मौजूद हैं जो शादी को एक सुंदर बंधन मानते हैं ना कि इसे पैसों के तराजू पर तौलते हैं. ऐसा ही एक मामला सहारनपुर के छुटमलपुर से सामने आया है जहां प्रफुल्ल राणा नाम के इंजीनियर ने अपनी शादी में मिलने वाले 21 लाख रुपये लौटा दिए. इस दौरान प्रफुल्ल ने कुछ ऐसा कहा कि वहां मौजूद लोग खुश होकर ताली बजाने लगे. वहीं लड़की पक्ष के लोग इमोशनल हो गए. 

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दूल्हे ने 21 लाख रुपये का शगुन लौटा दिया

इंजीनियर प्रफुल्ल राणा की शादी नोएडा की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर साक्षी राणा के साथ 14 फरवरी को हो रही थी.शादी के दौरान साक्षी राणा के पिता ने शगुन के नाम पर 21 लाख रुपये देने की कोशिश की. लेकिन तभी प्रफुल्ल ने माइक थामकर सभी रुपयों को सम्मानपूर्वक लौटाने की घोषणा कर दी.  उन्होंने कहा कि शादी दो दिलों और दो परिवारों का मिलन है कोई सौदा नहीं. हम दोनों आत्मनिर्भर हैं और इस रिश्ते को लेन-देन का माध्यम नहीं बनने देंगे.  प्रफुल्ल ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें सिर्फ आशीर्वाद चाहिए. उन्होंने कहा कि साक्षी उनके घर की बहू नहीं बेटी बनकर आ रही हैं. दूल्हे की यह बात सुनते ही समारोह में मौजूद मेहमान भावुक हो गए और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा.

बेटे के फैसले पर सब इंस्पेक्टर पिता यशपाल ने ये कहा

वहीं दूल्हे के पिता यशपाल सिंह जो मेरठ में सब इंस्पेक्टर हैं उन्होंने भी बेटे के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि जब हम समाज को दहेज के खिलाफ कानून और नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं तो खुद उदाहरण भी पेश करना चाहिए. दुल्हन के पिता रविंद्र राणा ने वर पक्ष के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है.  उन्होंने बताया कि वर पक्ष ने दहेज के रूप में केवल 1 रुपया शगुन स्वीकार किया और शेष पूरी राशि लौटा दी.  शादी के बाद साक्षी ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे ऐसे परिवार का हिस्सा बनी हैं जहां उनकी शिक्षा और संस्कार को महत्व दिया गया ना कि पैसों को.  उनके अनुसार ससुराल वालों के लिए दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज है.

शादी के बाद प्रफुल्ल ने कहा कि यह केवल विवाह नहीं बल्कि एक सामाजिक संदेश था. दहेज प्रथा परिवारों पर आर्थिक बोझ डालती है और बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता को बढ़ावा देती हैं. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे दहेजमुक्त विवाह को अपनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं.इस पहल ने न सिर्फ दोनों परिवारों को गौरवान्वित किया बल्कि समाज को भी यह संदेश दिया कि रिश्ते सम्मान, प्रेम और समानता से मजबूत होते हैं पैसों से नहीं.