Raebareli Employment News: योगी सरकार एक ओर जहां प्रदेश के युवाओं को ज्यादा से ज्यादा लोन देकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने की पुरजोर कोशिशों में जुटी है, वहीं दूसरी ओर जिले के बैंक और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी मुहिम को लेकर कतई गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं. बैंकों की इस उदासीनता और लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण अप्रैल महीने से लटके पड़े जिले के लगभग 400 आवेदन दे रहे हैं, जो धूल फांक रहे हैं.
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उद्योग उपायुक्त के नियमों के अनुसार, स्वरोजगार के लिए आए आवेदनों पर बैंकों को 15 दिन के भीतर लोन उपलब्ध कराना अनिवार्य है. इसके बावजूद जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. बैंक लाभार्थियों को लोन देने के नाम पर दो से चार महीनों तक लगातार दौड़ा रहे हैं.
15 दिन का दावा हवा, महीनों से कैद हैं फाइलें
15 दिनों के अंदर युवाओं को लोन मुहैया कराने का दम भरने वाली 'सीएम युवा उद्योग योजना' अब पूरी तरह से बैंकों के हाथ की कठपुतली बनकर रह गई है. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि आवेदकों को महीनों से बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिसके चलते बेरोजगार युवाओं को समय पर काम नहीं मिल पा रहा है. जिले में 400 से अधिक युवाओं की फाइलें बैंकों में कैद हैं. रोजगार देने के लिए सरकार तो पूरी तरह तैयार है, लेकिन बैंक अपनी जिम्मेदारी निभाने में लगातार पीछे हट रहे हैं.
लक्ष्य से कोसों दूर आंकड़े, योजना के लाभ के लिए आगे आ रहे युवा
'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' के तहत जनपद को इस साल 2500 का लक्ष्य मिला है. युवाओं में स्वरोजगार को लेकर उत्साह है, जिसके चलते अब तक 1221 लोगों ने लोन के लिए आवेदन किया. उद्योग केंद्र ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए 1128 आवेदनों को पास कर बैंकों को भेज दिया. लेकिन बैंकों के सुस्त रवैये के कारण मात्र 302 आवेदनों को ही लोन की स्वीकृति मिल सकी और इनमें से भी महज 240 लोगों को ही वास्तव में लोन की रकम वितरित की गई. यही हाल ओडीओपी (ODOP) योजना का भी है. इस साल 17 लोगों को लोन देने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 15 लोगों ने आवेदन किया. उद्योग केंद्र की ओर से 10 आवेदन बैंकों को भेजे गए, लेकिन बैंकों ने केवल चार आवेदनों को ही स्वीकृति दी और अब तक सिर्फ एक लाभार्थी को ही लोन की राशि मिल सकी है.
पीड़ित की जुबानी: एक महीने तक बैंक ने घुमाया
गंगागंज के रहने वाले एक युवा उद्यमी अंकित त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने चाय की दुकान शुरू करने के लिए 'सीएम युवा उद्योग योजना' के तहत आवेदन किया था. आवेदन होने के बाद बैंक कर्मचारी उन्हें एक महीने तक लगातार दौड़ाते रहे. थक-हारकर जब वह दोबारा जिला उद्योग केंद्र पहुंचे, तब वहां के अधिकारियों के हस्तक्षेप और कड़े रुख के बाद ही उन्हें कर्ज मिल सका.
लापरवाही बरतने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
डीएम सरनीत कौर ब्रोका ने बताया कि योजना के तहत बैंकों को सभी पत्रावलियों को स्वीकृत समय सीमा के भीतर ही निस्तारित कर देना चाहिए. अगर इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही बरत रहा है, तो इसकी जांच कराकर सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
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