इस्तीफा दे देना चाहिए... नमाज विवाद पर HC ने संभल डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके बिश्नोई को लगाई तगड़ी फटकार

Sambhal Namaz Controversy: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम और एसपी को लगाई कड़ी फटकार. कोर्ट ने कहा- अगर कानून व्यवस्था नहीं संभाल सकते तो इस्तीफा दें अधिकारी.

Photo: L- Rajendra Pensiya, R- KK Bishnoi

पंकज श्रीवास्तव

14 Mar 2026 (अपडेटेड: 14 Mar 2026, 05:33 PM)

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Sambhal Namaz Controversy: रमजान के दौरान संभल में मस्जिद के भीतर नमाजियों की संख्या सीमित करने के पुलिस-प्रशासन के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने संभल के डीएम और एसपी को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि इबादत पर पाबंदी लगाना.

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दरअसल, संभल में एक मस्जिद के अंदर नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मुनासिर खान द्वारा दाखिल याचिका पर जस्टिस सिद्धार्थ नंदन और जस्टिस अतुल श्रीधरन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए यूपी सरकार, संभल के डीएम राजेंद्र पिनसिया और एसपी कुलदीप बिश्नोई को लेकर तल्ख टिप्पणी की. कोर्ट ने न केवल संख्या सीमित करने वाले आदेश को खारिज किया, बल्कि प्रशासन को कड़ा संदेश भी दिया.

हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी में क्या कहा?

डिवीजन बेंच ने कहा कि हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन का काम है. कोर्ट ने तीखे लहजे में कहा, "अगर एसपी और डीएम कानून व्यवस्था बनाए नहीं रख सकते, तो उन्हें या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर अपना ट्रांसफर मांग लेना चाहिए." कोर्ट ने आगे कहा कि अगर अधिकारियों को लगता है कि वे कानून का राज लागू करने के काबिल नहीं हैं, तो उन्हें संभल से बाहर चले जाना चाहिए. कोर्ट ने साफ किया कि राज्य की ड्यूटी हर हाल में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना है. 

मालिकाना हक पर फंसा पेंच

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्हें गाटा संख्या 291 पर नमाज अदा करने से रोका जा रहा है. उनके वकील ने दावा किया कि वहां मस्जिद है. हालांकि, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि राजस्व अभिलेखों में यह जमीन मोहन सिंह और भुराज सिंह के नाम दर्ज है और वहां केवल 20 लोगों को नमाज की अनुमति दी गई है. फिलहाल कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने और याचिकाकर्ता को साक्ष्य पेश करने के लिए समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी.

प्राइवेट प्रॉपर्टी पर नमाज के लिए परमिशन की जरूरत नहीं

हाईकोर्ट ने इस दौरान बरेली के एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए दोहराया कि प्राइवेट प्रॉपर्टी पर पूजा या इबादत के लिए पहले से किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है. बरेली के मोहम्मदगंज गांव का हवाला देते हुए कोर्ट ने बताया कि वहां हसीन खान के घर में नमाज पढ़ने पर पुलिस ने उन्हें उठा लिया था और चालान किया था. इस मामले में भी कोर्ट ने बरेली के डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य को फटकार लगाई है और उन्हें 23 मार्च को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि पेश न होने पर अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जाएगा.

संभल के डीएम और एसपी अपनी कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी चर्चा और विवादों में रहे हैं, खासकर संभल हिंसा के बाद की स्थितियों को लेकर. अब हाईकोर्ट की इस ताजा टिप्पणी ने प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है.