संभल जामा मस्जिद सर्वे हिंसा: चर्चित पुलिस अफसर अनुज चौधरी पर क्यों FIR दर्ज करने का आदेश? समझिए पूरा मामला

sambhal jama masjid case latest updates: संभल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने ASP अनुज चौधरी समेत 15 से 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. यह आदेश एक घायल युवक आलम के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया है

Anuj Chaudhary

अभिनव माथुर

14 Jan 2026 (अपडेटेड: 14 Jan 2026, 12:28 PM)

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sambhal jama masjid case latest updates:संभल हिंसा मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. संभल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने ASP अनुज चौधरी समेत 15 से 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. यह आदेश एक घायल युवक आलम के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया है जिन्होंने पुलिस पर लापरवाही और बिना वजह गोलीबारी करने का आरोप लगाया था.

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संभल हिंसा में बेटे की मौत के बाद पिता ने की थी शिकायत

यह मामला 24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा से जुड़ा है. आलम नाम के व्यक्ति के पिता यामीन ने संभल कोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट से पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. याचिकाकर्ता का दावा है कि उसका बेटा 24 नवंबर 2024 को सुबह करीब 8 बजे ठेले पर बिस्किट बेचने निकला था. याचिका के अनुसार सुबह 8:45 बजे जब वह जामा मस्जिद के पास पहुंचा तो वहां भारी भीड़ मौजूद थी. आरोप है कि मौके पर मौजूद सीओ अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों ने जान से मारने की नीयत से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. यामीन का दावा है कि जब आलम जान बचाकर भागा तो पुलिस की दो गोलियां उसकी पीठ और एक गोली हाथ में लगी. स्थानीय लोगों की मदद से वह घर पहुंचा.लेकिन संभल के अस्पतालों ने डर के कारण इलाज करने से मना कर दिया. कई अस्पतालों में चक्कर लगाने के बाद किसी तरह बेटे की जान बची. पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस गंभीर घटना के बाद उन्होंने न्याय के लिए जिले के कप्तान से लेकर शासन के उच्चाधिकारियों तक गुहार लगाई. लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई.

कोर्ट ने दिए सख्त आदेश

प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने के बाद पीड़ित परिवार ने संभल कोर्ट में याचिका दायर की थी. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका स्वीकार कर ली. कोर्ट ने आदेश दिया है कि तत्कालीन एएसपी अनुज चौधरी और उनके साथ मौजूद 15-20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए. कोर्ट ने इस मामले में पुलिस प्रशासन को ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए हैं. संबंधित थाने को आदेश दिया गया है कि एफआईआर दर्ज कर एक हफ्ते के भीतर कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाए.

'नहीं दर्ज होगी FIR'

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मौखिक तौर पर बताया कि 'संभल हिंसा के मामले में ज्यूडिशल इंक्वारी पहले ही हो चुकी है जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट ने आदेश किया है उनकी जांच पूरी हो चुकी है. इसलिए हम इस मामले में कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं करेंगे और इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में अपील करेंगे.'

क्या था संभल हिंसा विवाद

एक याचिका अदालत में दायर की गई थी जिसमें दावा किया गया था कि संभल की 16वीं सदी की जामा मस्जिद मूल रूप से एक प्राचीन हरिहर मंदिर के खंडहरों पर बनी है. अदालत ने इस दावे की जांच के लिए सर्वे का आदेश दिया था. 19 नवंबर को पहला सर्वे शांतिपूर्वक हुआ. लेकिन 24 नवंबर को दूसरे सर्वे के दौरान तनाव फैल गया. सर्वे के दौरान मस्जिद के पास भारी भीड़ जमा हो गई. अफवाहें फैलीं कि मस्जिद के भीतर खुदाई की जा रही है जिससे गुस्सा बढ़ गया. इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई. इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हुई और करीब 29 सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे.

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