डॉक्टर चतुर्वेदी ने जबरन मरोड़ दिया घुटना, चीखती रही 14 साल की लड़की... मुजफ्फरनगर का ये मामला चौंकाऊ है!

Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर में 14 साल की बच्ची के इलाज को लेकर जिला अस्पताल पर गंभीर आरोप लगे हैं. पीड़ित मां ने रिश्वतखोरी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पैसे न मिलने पर डॉक्टर ने बच्ची का पैर दोबारा क्षतिग्रस्त कर दिया. मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं.

Muzaffarnagar News

Muzaffarnagar News

संदीप सैनी

• 02:18 PM • 04 Jun 2026

follow google news

Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक चौंकाने वाली खबर समने आई है. कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी 14 साल की बेटी को लेकर पहुंची रेशमा को देखकर वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारी भी हैरान रह गए. पीड़ित मां ने जिले के सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम पर इलाज के नाम पर रिश्वतखोरी और हैवानियत की हदें पार करने के आरोप लगाए हैं. महिला का आरोप है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर ने मुफ्त इलाज के प्रशासनिक आदेश के बावजूद ना सिर्फ हजारों रुपये वसूले बल्कि पैसे कम पड़ने पर उसकी मासूम बेटी का घुटना जबरन मोड़कर उसके पैर की हड्डी दोबारा तोड़ दी. कलेक्ट्रेट पहुंची रेशमा की इन बातों के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी  ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. 

यह भी पढ़ें...

मुफ्त इलाज के आदेश के बाद भी वसूले गए पैसे

पीड़ित मां रेशमा के मुताबिक, करीब डेढ़ महीने पहले उसकी बेटी के दाहिने पैर की हड्डी टूट गई थी जिसका ऑपरेशन जिला अस्पताल में होना था. आरोप है कि अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों ने इस सरकारी और मुफ्त इलाज के बदले महिला से ₹25000 की रिश्वत मांगी. जब रेशमा ने रोते हुए खुद को विधवा बताया और असमर्थता जताई तो डॉक्टरों ने इलाज करने से साफ मना कर दिया. थक-हारकर महिला ने जिलाधिकारी के पास जाकर गुहार लगाई जिसके बाद सीएमओ को मुफ्त इलाज करने के कड़े निर्देश दिए गए. लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी थीं कि अस्पताल स्टाफ ने डीएम के आदेश के बावजूद महिला से जबरन ₹8000 ऐंठ लिए और बाकी रकम बाद में देने का दबाव बनाया.

चीखती रही मासूम और डॉक्टर ने जबरन मरोड़ दिया पैर

वारदात का सबसे खौफनाक मंजर ऑपरेशन के बाद फॉलो-अप चेकअप के दौरान सामने आया. रेशमा अपनी बेटी को लेकर जब अस्पताल पहुंची ताकि डॉक्टर देख सकें कि घुटना मुड़ रहा है या नहीं. आरोप है कि इस दौरान ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर चतुर्वेदी ने उसकी बेटी का घुटना जबरन मोड़ दिया. मासूम दर्द से चिल्ला पड़ी और पैर से हड्डी टूटने की आवाज आई, लेकिन डॉक्टरों ने उसे वहां से भगा दिया. बाद में जब पैर का एक्स-रे कराया गया तो उसमें हड्डी टूटी हुई आई. परेशान मां ने बड़े डॉक्टरों से शिकायत की पर किसी ने नहीं सुनी.

मामला बढ़ता देख बैकफुट पर विभाग

इस मामले के कलेक्ट्रेट पहुंचने और मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद मुजफ्फरनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने मामले का संज्ञान लिया है. सीएमओ ने कहा कि यह बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है. उन्होंने बताया कि आरोपी डॉक्टर और स्टाफ का बयान लिए बिना अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. लेकिन एक बेबस मां के इन आरोपों को दरकिनार नहीं किया जा सकता.

सीएमओ ने आश्वस्त किया है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जा रहा है. अगर जांच में डॉक्टर चतुर्वेदी या किसी भी अस्पताल कर्मी की लापरवाही, अवैध वसूली या क्रूरता की पुष्टि होती है तो उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.