'जज साहब, मैं गरीब हूं, आज ही सजा दे दीजिए...'  27 साल पुराने केस का 6 घंटे में आ गया फैसला, बुजुर्ग की गुहार पर आया अंतिम फैसला!

Baghpat Court Case: बागपत की एक अदालत में शनिवार को ऐसा मामला सामने आया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. करीब 27 साल पुराने एक मुकदमे में बुजुर्ग आरोपी खुद अदालत पहुंच गया.

Baghpat Court Verdict News

Baghpat Court Verdict News (Photo: AI Generated)

मनुदेव उपाध्याय

• 11:19 AM • 09 Jun 2026

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Baghpat Court Verdict News: बागपत की एक अदालत में शनिवार को ऐसा मामला सामने आया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. करीब 27 साल पुराने एक मुकदमे में बुजुर्ग आरोपी खुद अदालत पहुंच गया और जज के सामने हाथ जोड़कर कहा, 'मैं गरीब परिवार से हूं, बूढ़ा और बीमार हूं, बार-बार कोर्ट आने में असमर्थ हूं. मेरा अपराध स्वीकार है, आज ही सजा दे दीजिए.' आरोपी की इस अपील के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए उसे 'न्यायालय उठने तक की सजा' और एक हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया. इसके साथ ही वर्षों से लंबित मुकदमे का अंत हो गया.

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साल 1999 में दर्ज हुआ था मामला

जानकारी के अनुसार, यह मामला 26 जून 1999 का है. सरूरपुर कलां निवासी धारा सिंह ने गांव के ही राजेंद्र समेत तीन लोगों के खिलाफ गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी गई थी, लेकिन मामला लंबे समय तक लंबित रहा. इस दौरान आरोपी राजेंद्र कई बार अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और बाद में कुर्की वारंट तक जारी किए गए.

अदालत पहुंचकर किया आत्मसमर्पण

शनिवार सुबह करीब 11 बजे राजेंद्र अचानक अदालत पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया. उसने अदालत को बताया कि वह वृद्धावस्था, बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है. उसने बिना किसी बहस के अपना अपराध स्वीकार करते हुए मुकदमे का तत्काल निस्तारण करने की गुहार लगाई. अदालत ने सुनवाई के बाद उसे 'न्यायालय उठने तक' की सजा सुनाई. साथ ही गाली-गलौज के मामले में 300 रुपये और जान से मारने की धमकी देने के मामले में 700 रुपये, कुल एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना जमा नहीं करने पर आरोपी को 10 दिन की जेल की सजा भुगतनी होगी.

जिले में चर्चा का विषय बना फैसला

निर्धारित सजा की अवधि पूरी करने और अर्थदंड जमा करने के बाद राजेंद्र शाम करीब पांच बजे अपने घर लौट गया. जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि जिले में संभवतः यह पहला मामला है, जिसमें अदालत ने "एक दिन के समय की सजा" सुनाकर 27 साल पुराने विवाद का निस्तारण किया है. इस फैसले से एक ओर जहां पीड़ित पक्ष को न्याय मिला, वहीं दूसरी ओर आरोपी को भी करीब तीन दशक पुराने मुकदमे के बोझ से राहत मिल गई.