भदोही में सांड के हमले से मां-बेटे की दर्दनाक मौत, 10 साल पहले सिर से उठा था पिता का साया, अब कोई नहीं बचा

महेश जायसवाल

• 06:19 PM • 09 Aug 2026

भदोही में छुट्टा सांड के हमले ने मां-बेटे की जान ले ली. बाइक से जा रहे प्रियांशु और उनकी मां विनीता गंभीर घायल हुए थे. BHU ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान दोनों की मौत से परिवार और गांव में मातम छा गया.

Bhadohi News:सांकेतिक तस्वीर

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में आवारा पशु के हमले ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह खत्म कर दिया. 10 साल पहले पिता को खो चुके एक परिवार में मां विनीता सिंह और बेटा प्रियांशु ही एक-दूसरे का एकमात्र सहारा बचे थे. गोपीगंज थाना क्षेत्र में अपनी मां को बाइक से लेकर जा रहे प्रियांशु पर रास्ते में अचानक छुट्टा सांड ने हमला कर दिया. इस हादसे में मां और बेटा दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए. BHU ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया. एक ही झटके में उजड़े इस परिवार के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है.

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रास्ते में सांड ने अचानक किया हमला

घटना भदोही के गोपीगंज थाना क्षेत्र स्थित पर्वतपुर गांव की है. प्रियांशु सिंह अपनी मां विनीता सिंह को बाइक पर बैठाकर अमवा गांव जा रहे थे. रास्ते में अचानक एक छुट्टा सांड आ गया और उसने मां-बेटे पर हिंसक हमला कर दिया. हमले के बाद दोनों सड़क पर गिरकर बुरी तरह जख्मी हो गए.

चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीण

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. चीख-पुकार सुनकर पहुंचे स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद सांड को वहां से भगाया. ग्रामीणों ने तुरंत दोनों घायलों को उठाकर नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर वाराणसी के लिए रेफर कर दिया.

इलाज के दौरान पहले बेटे फिर मां ने तोड़ा दम

बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने दोनों को बचाने की काफी कोशिश की. लेकिन जिंदगी और मौत की इस जंग में दोनों हार गए. इलाज के दौरान पहले बेटे प्रियांशु की मौत हुई और कुछ ही देर बाद मां विनीता ने भी दम तोड़ दिया. पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है.

10 साल पहले हुआ था पिता का निधन

मृतक प्रियांशु के पिता का करीब 10 साल पहले ही निधन हो गया था. पिता के गुजर जाने के बाद मां विनीता ने ही संघर्षों के बीच बेटे को संभाला था और बेटा मां का सहारा बना हुआ था. तीन सदस्यों वाले इस छोटे से परिवार में अब कोई भी जीवित नहीं बचा है. इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में शोक की लहर है और लोग छुट्टा पशुओं के आतंक को लेकर आक्रोशित हैं.