UGC New Rules Protest: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर सामान्य वर्ग का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है. देश की राजधानी दिल्ली में यूजीसी दफ्तर के बाहर भारी संख्या में सामान्य वर्ग के लोगों ने प्रदर्शन किया और इन नियमों को 'काला कानून' करार दिया. आपको बता दें कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए यूजीसी के नए नियमों ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है. दिल्ली स्थित यूजीसी दफ्तर के बाहर सवर्ण समाज और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार से इन नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की.
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प्रदर्शनकारियों के मुख्य आरोप और मांगें
प्रदर्शन में मुरादाबाद, बुलंदशहर और पश्चिमी यूपी के कई जिलों से लोग शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह नियम सवर्ण समाज को 'पूर्व निर्धारित अपराधी' मान लेता है. इससे समाज में नफरत और भेदभाव बढ़ेगा, घटेगा नहीं. लोगों का आरोप है कि यूजीसी ने जो 'इक्विटी कमेटी' बनाई है, उसमें केवल एससी, एसटी और ओबीसी के सदस्यों को रखा गया है. इसमें सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जिससे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती.
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सवर्ण समाज के छात्र कॉलेज जाने से डर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि झूठे आरोपों के आधार पर उनका करियर चौपट किया जा सकता है.
राजनीतिक असर और इस्तीफों का दौर
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इन नियमों को वापस नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा. प्रदर्शन के दौरान बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा इस्तीफा दिए जाने और बीजेपी के कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफों का भी जिक्र किया गया, जिसे सवर्ण समाज की आहत भावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी सख्त कानून होना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन और भी उग्र होगा.
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