Dhirendra Pratap Singh Murder Case: लखनऊ में हिंदूवादी नेता धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या के मामले में नई जानकारी सामने आई है. शुरुआती जांच में जिस जमीन विवाद का शक जताया जा रहा था, अब पुलिस की पड़ताल में उसकी पुष्टि होने की बात सामने आई है. जानकारी के मुताबिक उन्नाव के बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में करीब 40 करोड़ रुपये कीमत की ग्राम समाज की जमीन और तालाब पर कब्जे के खिलाफ धीरेंद्र प्रताप सिंह लगातार आवाज उठा रहे थे. आरोप है कि इसी वजह से उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची गई. जानकारी के मुताबिक हत्या के मामले में धीरेंद्र के ड्राइवर रवि तिवारी और उसके साथी मोनू को गिरफ्तार किया गया है.
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जमीन पर कब्जे का विरोध कर रहे थे धीरेंद्र
जानकारी के मुताबिक बांगरमऊ तहसील की करीब 8 बीघा ग्राम समाज की जमीन पर भूमाफियाओं ने फर्जी कागजात के जरिए कब्जा कर लिया था. इसी जमीन की कीमत करीब 40 करोड़ रुपये बताई जा रही है. आरोप है कि तालाब की जमीन तक की रजिस्ट्री करा दी गई थी. धीरेंद्र प्रताप सिंह ने वर्ष 2024 में तहसील और ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे की शिकायत की थी. वह बांगरमऊ तहसील के अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए लगातार भूमाफियाओं के खिलाफ शिकायत कर रहे थे.
सरकारी जमीन पर प्रस्तावित था CO का आवास
जिस सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप है, वहां बांगरमऊ के CO के आवास का निर्माण भी प्रस्तावित था. जांच में सामने आया है कि इसी जमीन को लेकर धीरेंद्र प्रताप सिंह भूमाफियाओं के लिए परेशानी बने हुए थे. आरोप है कि एक बड़ी रकम का लालच देकर उनके ड्राइवर रवि तिवारी से हत्या कराई गई. रवि बाराबंकी के जैदपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है. हत्या की साजिश में उसका सगा भाई भी शामिल बताया जा रहा है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है.
ड्राइवर रवि और मोनू गिरफ्तार
पुलिस ने हत्या के मामले में ड्राइवर रवि और उसके साथी मोनू को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं रवि के भाई की तलाश जारी है. जानकारी के मुताबिक, रवि का भाई अपनी पत्नी की हत्या के मामले में भी जेल जा चुका है. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर हत्या की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है.
फॉर्च्यूनर से शव ले जाकर नहर में फेंका
धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या के बाद आरोपियों ने शव को उनकी ही फॉर्च्यूनर गाड़ी से दुबग्गा के सुनसान इलाके में ले जाकर फेंक दिया था. इससे पहले उनकी हत्या गाड़ी में ही किए जाने की बात सामने आई थी. आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए फॉर्च्यूनर की नंबर प्लेट भी निकाल दी थी. अब जमीन विवाद, ड्राइवर की भूमिका और कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों को लेकर पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है.
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