असली बात यह है कि… लखनऊ में बहन दिव्या की हत्या के बाद पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा ने 25 पॉइंट्स लिख कहानी में लाया नया मोड़!

यूपी तक

• 11:03 AM • 24 Aug 2026

लखनऊ में बैंककर्मी दिव्या मिश्रा की दिनदहाड़े पति मानस के हाथों हत्या के बाद ये मामला सुर्खियों में है. बता दें की पत्नी की हत्या के बाद मानस ने अपनी बहन का मर्डर किया और खुद की भी जान ले ली.

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Divya Mishra Murder Case

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Divya Mishra Murder Case: लखनऊ में बैंककर्मी दिव्या मिश्रा की दिनदहाड़े पति मानस के हाथों हत्या के बाद ये मामला सुर्खियों में है. बता दें की पत्नी की हत्या के बाद मानस ने अपनी बहन का मर्डर किया और खुद की भी जान ले ली. दिव्या की बहन और पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा लगतार इस हत्यकांड को लेकर सवाल उठा रही हैं. 

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फिर एक बार प्रज्ञा पोस्ट लिख कई गंभीर सवाल उठाए हैं. प्रज्ञा ने पोस्ट में दिव्या पर डेढ़ करोड़ रुपये की एलिमनी मांगने के प्रचार को गलत बताया. उन्होंने स्त्रीधन और एलिमनी के बीच अंतर बताया है. इसके साथ ही उन्होंने हत्याकांड में इस्तेमाल हुए हथियारों, मानस की मानसिक स्थिति, उसके कथित ‘चीट’ वाले स्टेटस और हत्या के बाद उसकी गतिविधियों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं. प्रज्ञा का कहना है कि यह मामला इतना सीधा नहीं है और पुलिस को इन सभी ऐंगल्स की जांच करनी चाहिए.

देखिए प्रज्ञा ने क्या-क्या कहा?

प्रज्ञा मिश्रा ने अपनी पोस्ट में दिव्या पर डेढ़ करोड़ रुपये की एलिमनी मांगने के प्रचार को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि एलिमनी और स्त्रीधन अलग-अलग चीजें हैं. उनके मुताबिक, एलिमनी कानूनी तौर पर तलाक के बाद मांगी जा सकती है, जबकि दिव्या का केस कोर्ट में दाखिल हुए एक साल भी पूरा नहीं हुआ था और वह अभी मध्यस्थता या काउंसलिंग के शुरुआती चरण में ही था. प्रज्ञा ने दावा किया कि काउंसलिंग के छह राउंड में से दिव्या के मामले में केवल एक राउंड हुआ था. इसलिए उनके मुताबिक डेढ़ करोड़ रुपये की एलिमनी की बात गलत है.

प्रज्ञा ने बताया कि स्त्रीधन शादी से पहले, शादी के समय या शादी के बाद महिला को मिले उपहार और जेवरात होते हैं, जिन पर महिला का अधिकार होता है. उन्होंने कहा कि दिव्या ने अपने स्त्रीधन को साबित करने के लिए बिल और तस्वीरें कोर्ट में लगाई थीं. हालांकि, प्रज्ञा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि स्त्रीधन की कितनी राशि की मांग की गई थी. उन्होंने कहा कि अगर डेढ़ करोड़ रुपये के स्त्रीधन की मांग की गई थी तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिव्या के माता-पिता ने शादी में कितना स्त्रीधन दिया होगा. प्रज्ञा के मुताबिक, दिव्या आर्थिक रूप से मानस से ज्यादा मजबूत थीं, इसलिए ‘एलिमनी’ शब्द का इस्तेमाल केवल कीचड़ उछालने के लिए किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "घर में माहौल ऐसा नहीं है कि वीडियो बना पाऊं. इसलिए समय मिलने पर अपनी बात लिखकर आपसे संवाद करती हूं. अब आती हूं असली बात पर...

1- अब असली बात ये नहीं है कि हत्यारा मानस सनकी, साइको, डुअल पर्सनालिटी, घरेलू हिंसा प्रेमी था..असली बात ये है कि जिस व्यक्ति के घर पर एक बांस की मजबूत लाठी भी नहीं थी…उसके घर पर दो पिस्टल..और एक देसी तमंचा कहां से आया ?
2- कौन उसे इस हत्याकांड के लिए मोटीवेट कर रहा था ?
3- वो बाजार से पकाने के लिए एक बार में सारी जरूरी सब्जियां नहीं ला सकता था…उसे रेयर पिस्टल कैसे मिले? कौन से हथियार किसकी हत्या में इस्तेमाल हुए ?
4- किसने उसे इस जघन्य अपराध के लिए तैयार किया ?
5- कौन था हत्यारे मानस का कोच ?
6- व्यक्ति इतना ट्रिगर तभी होता है जब उसे कोई रोज भड़काए ? डिवोस केस तो लंबे समय से चल रहा था..अंतिम स्टेटस में हत्यारे ने चीट शब्द लिखा..अगर मानस को मालूम था कि दिव्या उसे चीट कर रही है.. तो तलाक के केस में उसे अपनी पत्नी को चरित्रहीन साबित करके अपरहैंड मिल जाता…क्या ‘चीट’ शब्द पुलिस को भटकाने के लिए लिखा गया ?
7- क्या हत्यारे मानस की मानसिक स्थिति का किसी ने इस्तेमाल किया है?
8- क्या किसी की नजर मानस के घर में मौजूद कथित ‘डेढ़ करोड़’ के स्त्रीधन पर थी ?
9- मानस साइको था..घरेलू हिंसा का आदी था..लेकिन समाज में सभ्यता दर्शाता था..वो चींटी नहीं मार सकता था..
10- हत्यारा घर में पिस्टल और तमंचे नहीं उगाया होगा कहीं से तो लाया होगा..?
11- अगर बैंक के सामान्य बाबू की पहुंच पिस्टल गिरोह तक है तो फिर लखनऊ को सतर्क रहने की जरूरत है
12- मानस ने तीन में से किसी को दूर से शूट नहीं किया सबको सटाकर सिर में गोली मारी..क्या ये प्लान था…या फिर दिव्या को मानस ने मारा
मानस और शीबा को किसी और ने मार दिया ?
14- ये ओपन शट केस नहीं है…बहुत ज्यादा मिस्टीरियस केस है ?
15- बैंक और घर की दूरी 10-15 मिनट की थी..दिव्या की हत्या के बाद 35-45 मिनट मानस कहां था ?
16- क्या मानस के फोन में स्टेटस किसी और ने अपडेट किया..क्योंकि मानस हिंग्लिश में लिखता था..स्टेटस अपडेट इंग्लिश में था ?
17- क्या हत्याकांड और घर के रास्ते के बीच हत्यारा मानस कहीं और भी रुका था ?
18 - अगर रुका था तो किसके पास..क्या अपने कोच के पास ?
19- क्या मानस के घर के भीतर कोई तीसरा भी मौजूद था जिसने मानस और उसकी बहन को मारा ?
20- क्या मानस के घर के भीतर घुसने और निकलने का कोई और रास्ता भी था ?
21- पुलिस को इन पहलुओं पर जांच करनी चाहिए…अगर इन सब सवालों के जवाब नहीं मिलते हैं..
22- पिस्टल कहां से आईं नहीं मालूम चलता है तो केस किसी और एजेंसी को दिया जाना चाहिए..
23- सच्चाई का बाहर आना बहुत जरूरी है..ये ओपन एंड शट केस नहीं है, मेरी बहन और उस मानसिक बीमार लड़की शीबा को न्याय मिलना चाहिए
24- लखनऊ में तीन हथियारों के साथ बैंक कर्मचारी मर्डर प्लान कर रहा है..असलहे ला रहे है
25- ऐसी पुलिसिंग से बेहतर माफिया काल था..कम से कम लोगों को मालूम तो होता था किससे सावधान रहना है."

प्रज्ञा मिश्रा ने अपनी पोस्ट में हत्याकांड की जांच को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा है कि मानस के पास दो पिस्टल और एक देसी तमंचा कहां से आए, उसे हथियार किसने उपलब्ध कराए और क्या किसी ने उसे इस हत्याकांड के लिए तैयार या प्रेरित किया था. उन्होंने दिव्या की हत्या के बाद मानस के घर पहुंचने के बीच के समय, फोन से किए गए स्टेटस और घर में किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी की संभावना पर भी सवाल उठाए हैं. प्रज्ञा का कहना है कि यह मामला ‘ओपन एंड शट केस’ नहीं है और इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है.

प्रज्ञा ने कहा कि अगर हथियारों के स्रोत और उठाए गए अन्य सवालों के जवाब जांच में नहीं मिलते हैं तो मामले को किसी दूसरी एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या मानस की मानसिक स्थिति का किसी ने इस्तेमाल किया और क्या हत्या के पीछे कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था. प्रज्ञा के मुताबिक, सच्चाई सामने आना जरूरी है और उनकी बहन दिव्या तथा मानस की बहन शीबा को न्याय मिलना चाहिए. उन्होंने लखनऊ में हथियारों की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई है.