Aditi Yadav Controversy: सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट किस तरह किसी की छवि और प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती हैं, इसका एक बड़ा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आया है. समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से अपमानजनक और भ्रामक पोस्ट साझा किए जाने के आरोप में साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, वहीं सपा कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी का माहौल देखने को मिल रहा है. पुलिस अब डिजिटल सबूतों और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच में जुट गई है.
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9 जून को वायरल पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत 9 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल होने के बाद हुई. आरोप है कि एक सोशल मीडिया अकाउंट से अदिति यादव के खिलाफ आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री साझा की गई, जिसमें उनकी तस्वीर के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई और ऐसे दावे किए गए जिनका उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना था. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पोस्ट में प्रसारित जानकारी पूरी तरह फर्जी तथ्यों पर आधारित थी और इसे जानबूझकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया.
सपा अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय सचिव ने दर्ज कराई शिकायत
इस मामले में शिकायत सपा अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण यादव की ओर से दर्ज कराई गई है. शिकायत में कहा गया है कि एक सोशल मीडिया आईडी, जिसकी शुरुआत ‘भरत कुमार पटेल’ नाम से हुई, से यह विवादित पोस्ट साझा की गई थी. इसके बाद कई अन्य लोगों ने पोस्ट को शेयर किया और उस पर टिप्पणियां भी कीं. शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह की पोस्ट ने न सिर्फ परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया बल्कि लोगों के बीच गलत संदेश भी फैलाया.
प्रवीण यादव ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी की छवि खराब करने का प्रयास करते हैं. उन्होंने इस घटना को बेहद निंदनीय और घृणित बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सामग्री पर लगाम लगाई जाए.
पुलिस ने तीन लोगों को किया नामजद
कानपुर साइबर क्राइम पुलिस ने मामले में भारत कुमार पटेल, नागेश्वर सिंह बघेल और विनोद कुमार यादव को नामजद किया है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79, 336(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66E के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस फिलहाल संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स, वायरल पोस्ट और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है.
सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी की जरूरत
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया के दुरुपयोग और फर्जी सूचनाओं के खतरों को सामने लाता है. आज के दौर में किसी तस्वीर को एडिट करना या बिना पुष्टि के जानकारी वायरल करना आसान हो गया है, लेकिन इसका असर किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा और निजी जीवन पर गंभीर रूप से पड़ सकता है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है.
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि डिजिटल सबूतों के आधार पर जल्द आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर बनी हुई है.
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