Eco Garden Lucknow Protest: लखनऊ का ईको गार्डन आज प्रदेश के सबसे चर्चित प्रदर्शन स्थलों में एक बन गया, जहां हजारों की संख्या में छात्र और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर एकजुट हुए. लेखपाल भर्ती, SSC कांस्टेबल समेत विभिन्न परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ यह आंदोलन लगातार तेज होता गया. छात्रों ने साफ कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक एजेंडे की नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की है.
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अभिजीत दीपके की एंट्री से बढ़ा विवाद
इस पूरे आंदोलन में सबसे ज्यादा चर्चा विवेक सर और कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर रही. अभिजीत दीपके ने पहले दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद लखनऊ आंदोलन में शामिल होने की घोषणा की थी. वे देर रात लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे और दावा किया कि वे छात्रों के समर्थन में आए हैं. हालांकि, प्रदर्शन स्थल पर उनके पहुंचने के बाद भीड़ और माहौल में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली.
छात्रों और शिक्षकों के एक वर्ग ने कहा कि आंदोलन को किसी भी राजनीतिक रंग से दूर रखना चाहिए. वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग उनके समर्थन में भी नजर आए. अभिजीत दीप को लेकर सोशल मीडिया पर पहले से ही बहस चल रही थी, जहां कुछ लोग उनकी उपस्थिति को समर्थन के रूप में देख रहे थे, जबकि कुछ इसे आंदोलन को भटकाने की कोशिश बता रहे थे.
ईको गार्डन में अलग-अलग ग्रुप, अलग-अलग प्रतिक्रिया
रिपोर्ट के अनुसार, ईको गार्डन में विवेक सर और छात्र एक तरफ मौजूद थे, जबकि अभिजीत दीपके अलग स्थान पर बैठे नजर आए. छात्रों का कहना था कि उनका फोकस सिर्फ भर्ती से जुड़े मुद्दों पर है और वे किसी भी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करना चाहते. कुछ छात्रों ने यहां तक कहा कि अगर मुद्दा भटकता है तो आंदोलन की दिशा कमजोर हो सकती है.
झंडा, नारे और छात्रों का जोश
सुबह से ही ईको गार्डन में छात्रों की भारी भीड़ जुटी रही. विवेक सर के नेतृत्व में ‘भारत माता की जय’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसे नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल और अधिक जोशीला हो गया. छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सिर्फ रोजगार और भर्ती सुधार की है, जिसमें वे किसी भी तरह का बाहरी एजेंडा नहीं चाहते.
प्रदर्शन के पीछे जुड़े ‘अनकहे किरदार’
इस आंदोलन में कई ऐसे नाम भी सामने आए जो सीधे तौर पर नेतृत्व में नहीं थे लेकिन व्यवस्था संभालने और भीड़ को एकजुट करने में अहम भूमिका निभा रहे थे.
राघव ठाकुर (आगरा) को इस आंदोलन का महत्वपूर्ण समन्वयक बताया गया, जिन्होंने पहले भी दरोगा भर्ती आंदोलन में भूमिका निभाई थी.
राघव पर पहले गिरफ्तारी और जेल जाने के भी आरोप लगे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने सोशल मीडिया और ग्राउंड दोनों स्तर पर आंदोलन को मजबूत किया. उन्होंने 31 सूत्रीय मांगों का भी उल्लेख किया, जिसमें स्कोर कार्ड, नॉर्मलाइजेशन और पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल हैं.
पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव
इस बीच खबरें आईं कि कुछ शिक्षकों को हिरासत में लिया गया और कुछ को नजरबंद किया गया, जिससे आंदोलन की दिशा पर असर पड़ सकता था. लेकिन सोशल मीडिया कैंपेन और छात्रों की एकजुटता के कारण आंदोलन जारी रहा.
प्रशासन की ओर से कहा गया कि प्रदर्शन के लिए अनुमति सीमित समय के लिए थी और तय समय के बाद ग्राउंड खाली करना होगा. साथ ही अगले दिन फिर से अनुमति लेकर प्रदर्शन करने की सलाह दी गई.
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