देवबंद में 2027 का चुनाव होगा दिलचस्प! BJP और SP के दावों के बीच BSP की तैयारी... क्या तीसरा मोर्चा बदलेगा जीत-हार का गणित?

Deoband Assembly Seat: 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सहारनपुर की देवबंद सीट पर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इस मुस्लिम बहुल सीट पर बीजेपी लगातार दो चुनाव जीत चुकी है, जबकि समाजवादी पार्टी पीडीए समीकरण के सहारे वापसी का दावा कर रही है, तो वहीं BSP-AIMIM का संभावित गठबंधन इस सीट का चुनावी गणित बदल सकता है.

यूपी तक

• 12:14 PM • 13 Jun 2026

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Deoband Assembly Seat: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीटों में से एक सहारनपुर की देवबंद विधानसभा सीट पर 2027 के चुनावों को लेकर अभी से सियासी हलचल तेज हो गई है. दारुल उलूम के कारण राष्ट्रीय पहचान रखने वाली इस सीट पर चुनावी नतीजे हमेशा से जातीय और धार्मिक समीकरणों से तय होते आए हैं. पिछले दो विधानसभा चुनावों (2017 और 2022) से यह सीट लगातार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कब्जे में है, और वर्तमान में यहां से कुंवर बृजेश सिंह विधायक हैं, जो यूपी सरकार में राज्य मंत्री (PWD) भी हैं. आगामी 2027 के चुनावों में यहां बीजेपी और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच सीधी और कड़ी टक्कर होने के संकेत मिल रहे हैं.

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जातीय समीकरण: मुस्लिम बहुल सीट पर हमेशा रहा ठाकुर वर्चस्व

देवबंद विधानसभा सीट के जातीय आंकड़े इसे बेहद दिलचस्प बनाते हैं. कुल लगभग 3.5 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर सबसे बड़ा वोट बैंक मुसलमानों का है, जिनकी संख्या करीब 1,20,000 है. इसके अलावा, यहां लगभग 70,000 दलित, 40,000 ठाकुर और करीब 40,000 गुर्जर मतदाता हैं. ब्राह्मण, वैश्य और अन्य समुदायों के वोट भी यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के बावजूद देवबंद से अब तक कोई मुस्लिम विधायक अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है. यहां लगातार ठाकुर नेतृत्व प्रभावशाली बना हुआ है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलता आ रहा है. 2022 के चुनाव में भी त्रिकोणीय मुकाबले के बीच कुंवर बृजेश सिंह (92,000 वोट) ने सपा के कार्तिकेय राणा (87,000 वोट) को हराया था.

प्रत्याशियों के दावे और 'पीडीए' (PDA) के भरोसे सपा

2027 के चुनाव को लेकर दोनों मुख्य दलों ने अपनी-अपनी जीत के दावे तेज कर दिए हैं. बीजेपी विधायक कुंवर बृजेश सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों और लोकप्रियता के दम पर वे तीसरी बार स्पष्ट बहुमत के साथ जीत दर्ज करेंगे. वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक माविया अली का दावा है कि इस बार 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण और पार्टी कार्यकर्ताओं की जमीनी मेहनत सपा को जीत दिलाएगी. उनका कहना है कि 2022 में टिकट बंटवारे में हुई देरी का नुकसान उठाना पड़ा था, लेकिन 2027 के लिए सपा का संगठन पूरी तरह तैयार और आश्वस्त है.

विश्लेषकों की राय: मनोज चौधरी और BSP-AIMIM गठबंधन कर सकता है खेला

स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 का चुनाव मुख्य रूप से उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की भूमिका पर निर्भर करेगा. यदि बसपा कमजोर रहती है, तो सीधा मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच होगा. विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर सपा यहां से गुर्जर समाज के कद्दावर नेता मनोज चौधरी को टिकट देती है, तो वर्तमान विधायक कुंवर बृजेश सिंह को बेहद कड़ी टक्कर मिलेगी. हालांकि, एक नया समीकरण और चर्चा में है. जानकारों के अनुसार, अगर बसपा और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के बीच उत्तर प्रदेश में गठबंधन होता है और वे कोई मजबूत उम्मीदवार उतारते हैं, तो देवबंद का चुनाव पूरी तरह त्रिकोणीय हो जाएगा, जिससे किसी की भी हार-जीत का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होगा.