झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र में एक युवती की मौत और उसके शव को गुपचुप तरीके से दफनाने की कोशिश ने सनसनी फैला दी है. 16 अप्रैल को हुई इस घटना में उस वक्त नया मोड़ आया, जब ईसाई (क्रिश्चियन) समुदाय की मृतका को मुस्लिम रीति-रिवाजों से दफनाने का प्रयास किया गया. कब्रिस्तान प्रशासन की सतर्कता के कारण मामला पुलिस तक पहुंचा और अब इस रहस्यमयी मौत की परतें खुलनी शुरू हुई हैं.
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धर्म बदलकर दफनाने की कोशिश पर हंगामा
मृतका की पहचान मणिपुर निवासी सिम्मी उर्फ टेरेसा के रूप में हुई है. वह क्रिश्चियन समुदाय से ताल्लुक रखती थी, लेकिन कुछ लोग उसे दफनाने के लिए मुस्लिम कब्रिस्तान ले गए. जब कब्रिस्तान के कर्मचारियों ने शिनाख्त मांगी, तो पता चला कि शव लाने वाले मुस्लिम समुदाय से थे. धर्म और पहचान के बीच इस विरोधाभास को देखते हुए कब्रिस्तान प्रशासन ने शव को दफनाने से इनकार कर दिया और तुरंत पुलिस को सूचना दी.
सहेली और कथित प्रेमी के दावों में झोल
पूछताछ के दौरान मृतका की सहेली जोया ने बताया कि सिम्मी आर्थिक तंगी और बीमारी से जूझ रही थी. जोया का दावा है कि सिम्मी ने मरने से पहले मुस्लिम रीति-रिवाज से दफनाने की इच्छा जताई थी. वहीं, मृतका के कथित प्रेमी इजहार ने पुलिस को बताया कि वे शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जा रहे थे, जबकि कब्रिस्तान के चौकीदार का बयान इसके बिल्कुल उलट है.
पुलिस इस बात पर भी हैरान है कि मृतका के परिवार ने कथित तौर पर पैसे न होने का हवाला देकर शव लेने से मना कर दिया, जो इस पूरी कहानी को और भी संदिग्ध बनाता है.
कानपुर से झांसी तक शव को घुमाने का रहस्य
जांच में यह भी सामने आया कि शव को दफनाने के लिए पहले कानपुर चुंगी स्थित कब्रिस्तान ले जाया गया था, लेकिन वहां से लौटाए जाने के बाद उसे झांसी के कब्रिस्तान लाया गया. बार-बार पहचान बदलना और बिना पोस्टमार्टम के जल्दबाजी में दफनाने की कोशिश ने पुलिस के शक को गहरा कर दिया है.
साजिश या बीमारी? पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
झांसी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही यह साफ करेगी कि सिम्मी की मौत वास्तव में बीमारी से हुई है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है. फिलहाल सभी संदिग्धों से पूछताछ जारी है और पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है.
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