अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद जहां एक ओर पूरी नगरी का कायाकल्प हो रहा है, वहीं दूसरी ओर सुप्रसिद्ध कनक भवन की ओर जाने वाली सड़क की बदहाली श्रद्धालुओं की आस्था और प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर रही है. कनक भवन मार्ग की जर्जर स्थिति के कारण देश-विदेश से आने वाले रामभक्तों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
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टूटी सड़क और उखड़े पत्थर बने मुसीबत
कनक भवन को जाने वाले इस मुख्य मार्ग पर लगे बड़े-बड़े पत्थर पूरी तरह टूट चुके हैं. सड़क पर गहरे गड्ढे और धूल के गुबार ने श्रद्धालुओं का चलना दूभर कर दिया है. सबसे ज्यादा परेशानी उन भक्तों को हो रही है जो श्रद्धावश नंगे पैर दर्शन के लिए जाते हैं. नुकीले पत्थर और ऊबड़-खाबड़ रास्ता न केवल ई-रिक्शा और वाहनों के लिए बाधा बना हुआ है, बल्कि आए दिन लोग यहां चोटिल भी हो रहे हैं.
संत समाज और व्यापारियों में नाराजगी
अयोध्या के तेजी से होते विकास के बीच इस महत्वपूर्ण मार्ग की अनदेखी से स्थानीय संत समाज में भारी रोष है. संतों का सवाल है कि जब पूरी अयोध्या चमक रही है, तो कनक भवन जैसे अति-महत्वपूर्ण स्थल का मार्ग वर्षों से उपेक्षित क्यों है? वहीं, स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि शाम के समय भारी भीड़ होने के कारण यहां स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिससे उनका व्यापार भी प्रभावित हो रहा है.
क्या कह रहे हैं जिम्मेदार अधिकारी?
- इस मामले पर जब अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने तकनीकी कारणों का हवाला दिया. प्रशासन के अनुसार:
- सड़क का निर्माण कार्य सीवर लाइन की मरम्मत की वजह से रुका हुआ है.
- सीवर का काम पूरा होते ही सड़क सुधारीकरण का कार्य प्राथमिकता पर शुरू किया जाएगा.
- मेला समाप्त होने के बाद मार्ग के शेष हिस्से का पुनर्निर्माण कराया जाएगा.
विकास मॉडल पर उठते सवाल
अयोध्या का नया स्वरूप और विकास मॉडल पूरी दुनिया में प्रभावशाली साबित हो रहा है, लेकिन कनक भवन मार्ग जैसी बुनियादी कमियां इस छवि को प्रभावित कर रही हैं. श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि संबंधित विभाग तालमेल बिठाकर इस समस्या का स्थाई समाधान निकालें, ताकि रामनगरी आने वाले भक्तों की यात्रा सुगम और सुरक्षित हो सके.
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