इलाज कराने आए थे या हिसाब चुकता करने? सुल्तानपुर में प्रेमी-प्रेमिका के घरवालों ने पुलिस के सामने ये क्या कर दिया

सुल्तानपुर के अस्पताल में लव स्टोरी को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष. मौके पर मौजूद पुलिस रोकने के बजाय मोबाइल से वीडियो बनाती रही, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल.

यूपी तक

• 02:26 PM • 02 Jun 2026

follow google news

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से कानून व्यवस्था और खाकी की मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक अस्पताल परिसर के भीतर 'लव स्टोरी' को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे और लात-घूंसे चले. इस पूरी हिंसक झड़प का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि घटना के वक्त पुलिसकर्मी मौके पर ही मौजूद थे, लेकिन वे उपद्रवियों को रोकने के बजाय मूकदर्शक बनकर अपने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करते नजर आए. अस्पताल के अंदर हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

यह भी पढ़ें...

इस पूरे फसाद की जड़ एक लड़के और लड़की के बीच का प्रेम संबंध है, जिसे लेकर दोनों के परिवारों के बीच लंबे समय से असहमति और तनाव चल रहा था. विवाद उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब लड़के के परिवार वाले शादी का प्रस्ताव लेकर लड़की के घर पहुंचे. वहां बातचीत बनने के बजाय दोनों पक्षों में तीखी कहासुनी शुरू हो गई. देखते ही देखते बात इतनी बढ़ी कि दोनों परिवारों के लोग आपस में भिड़ गए और उनके बीच लाठी-डंडे चलने लगे. इस मारपीट में दोनों पक्षों के कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल लाया गया.

अस्पताल परिसर बना जंग का मैदान, मूकदर्शक बनी रही पुलिस

हद तो तब हो गई जब यह खूनी संघर्ष घर की दहलीज से निकलकर सीधे अस्पताल परिसर के भीतर तक पहुंच गया. अस्पताल में भर्ती होने आए घायल और उनके तीमारदार एक बार फिर डॉक्टरों के सामने ही आपस में भिड़ गए. इस दौरान वहाँ स्थानीय पुलिस भी मुस्तैद थी, लेकिन वह इस भयानक बवाल को रोकने में पूरी तरह नाकाम और बेबस नजर आई. हमलावर एक-दूसरे को पीटते रहे और पुलिसकर्मी मूकदर्शक बनकर पूरी लड़ाई की वीडियो रिकॉर्डिंग करते रहे.

कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब आम जनता के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता काफी बढ़ गई है. सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब संवेदनशील अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात था, तो दबंगों में इतना दुस्साहस कहाँ से आया कि उन्होंने सरेआम कानून की धज्जियां उड़ा दीं. पुलिस ने समय रहते स्थिति पर नियंत्रण क्यों नहीं पाया?

फिलहाल, इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने दोनों ही पक्षों की तरफ से क्रॉस एफआईआर (Complaint) दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है. लेकिन इस घटना ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है. आने वाले दिनों में आला अधिकारियों को इस लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लेना होगा ताकि भविष्य में सरकारी अस्पतालों जैसी सुरक्षित जगहों पर ऐसी अराजकता को रोका जा सके और आम जनता का पुलिस पर विश्वास बहाल हो सके.