गोरखपुर में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 14 अप्रैल को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती को एक भव्य 'शक्ति प्रदर्शन' के रूप में मनाने की तैयारी कर रही है. बसपा सुप्रीमो मायावती के आह्वान पर पार्टी इस बार चुनावी मैदान में बिना किसी गठबंधन के अकेले उतरकर अपनी ताकत का अहसास कराएगी. गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर दलितों, पिछड़ों और वंचितों को एकजुट कर रहे हैं, ताकि विपक्ष और सत्तापक्ष को यह संदेश दिया जा सके कि बहुजन समाज का वोट बैंक पूरी तरह संगठित है.
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चुनावी सरगर्मी के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता बलराम साहेब ने भाजपा और सपा के गठबंधन की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जनता अब खोखले वादों के बजाय सामाजिक न्याय चाहती है. उन्होंने भाजपा की नीतियों का कड़ा विरोध करते हुए दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में बसपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी. इस बीच, गोरखपुर में बाबा साहेब की तस्वीर को अपमानित करने की एक हालिया कोशिश पर बसपा ने कड़ा आक्रोश जताया है. पार्टी का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से समाज में संवेदनशीलता और बढ़ गई है, जो चुनावी नतीजों में दलित समाज की एकजुटता के रूप में दिखेगी.
पार्टी इस बार केवल सामाजिक न्याय ही नहीं, बल्कि भू-माफियाओं और जमीनी विवादों जैसे गंभीर मुद्दों को भी चुनावी मुद्दा बना रही है. इलाहाबाद और गंगा कछार क्षेत्र में जमीन कब्जे की घटनाओं और माफिया प्रभाव के बीच बसपा यह दावा कर रही है कि उसके शासनकाल में ही प्रदेश में कानून का राज और सुरक्षित माहौल संभव है. बसपा नेताओं का तर्क है कि भाजपा शासन में बढ़ती 'न्यायहीनता' और जनता के आक्रोश के कारण लोग अब बसपा को एकमात्र विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में सक्षम है.
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