Ghazipur Weather Update: बारिश की बेरुखी से किसानों की बढ़ी चिंता, धान की रोपाई और सब्जियों की फसल पर संकट गहराया, सरकार से की राहत की मांग

Newzo

• 04:59 PM • 10 Jul 2026

Ghazipur Rain News:गाजीपुर में मानसून की सुस्त चाल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की रोपाई पिछड़ रही है और सब्जियों की फसलें प्रभावित हो रही हैं. सिंचाई का खर्च बढ़ने से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है. किसानों ने सरकार से राहत और सब्सिडी की मांग की है.

बारिश की बेरुखी से किसानों की बढ़ी चिंता, धान की रोपाई और सब्जियों की फसल पर संकट गहराया, सरकार से की राहत की मांग

बारिश की बेरुखी से किसानों की बढ़ी चिंता, धान की रोपाई और सब्जियों की फसल पर संकट गहराया, सरकार से की राहत की मांग

Google CTA

Ghazipur News: दिलदारनगर क्षेत्र में शुक्रवार को सुबह से आसमान में बादल छाए रहे, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है.मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण खेतों में नमी की कमी बनी हुई है, जिससे खरीफ फसलों, विशेषकर धान और सब्जियों की खेती प्रभावित हो रही है.

यह भी पढ़ें...

धान की रोपाई पर पड़ा असर 

बारिश नहीं होने से धान की रोपाई अपेक्षित गति से नहीं हो पा रही है.किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. वहीं सब्जियों की फसलें भी नमी के अभाव में मुरझाने लगी हैं.

सिंचाई पर बढ़ा खर्च 

लगातार बारिश नहीं होने से खेतों की मिट्टी सूखकर जगह-जगह फटने लगी है. ऐसे में किसान ट्यूबवेल के सहारे सिंचाई करने को मजबूर हैं. डीजल और बिजली पर बढ़ते खर्च ने खेती की लागत बढ़ा दी है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं.

किसानों ने जताई चिंता 

किसान मुन्ना राजभर, रविशंकर कुशवाहा और फिरोज खान ने बताया कि सामान्य वर्षों में जून माह तक धान की रोपाई लगभग पूरी हो जाती थी, लेकिन इस बार मानसून की धीमी रफ्तार के कारण रोपाई काफी पिछड़ गई है. उनका कहना है कि बादल तो रोज दिखाई देते हैं, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीदें टूट रही हैं.

सरकार से की राहत की मांग 

किसानों ने सरकार से मांग की है कि यदि वर्षा में और देरी होती है तो सिंचाई के लिए बिजली और डीजल पर विशेष सब्सिडी दी जाए. साथ ही कृषि विभाग के माध्यम से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि फसलों को सूखने से बचाया जा सके और किसानों को आर्थिक राहत मिल सके.