एआई समिट में चीन के रोबोटिक डॉग को अपना आविष्कार बताने के विवाद पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपनी सफाई दी है. यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एनके गौड़ ने इस पूरे मामले को 'गलत शब्दों का चुनाव' बताया है. रजिस्ट्रार ने स्वीकार किया कि रोबोट को यूनिवर्सिटी में विकसित (developed) नहीं किया गया था, बल्कि इसे एक भारतीय कंपनी से खरीदा (purchased) गया था. उन्होंने कहा कि प्रोफेसर नेहा सिंह ने 'डेवलप्ड' और 'डेवलपमेंट' शब्दों के बीच भ्रम के कारण गलत बयान दिया. यूनिवर्सिटी ने इसे अपनी ओर से गलती माना है और खेद व्यक्त किया है. रोबोट खरीदने का उद्देश्य बच्चों को वर्तमान वैश्विक तकनीक से परिचित कराना और उनके रिसर्च में मदद करना था.
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सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया गया है जिनमें कहा जा रहा था कि प्रोफेसर नेहा सिंह को नौकरी से निकाल दिया गया है. रजिस्ट्रार ने बताया कि उन्हें निकालने की बात गलत है, हालांकि यूनिवर्सिटी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है क्योंकि इस बयान से संस्थान और देश की छवि को नुकसान पहुंचा है.
'फेक थर्माकोल प्लेन' पर सफाई
समिट में दिखाए गए थर्माकोल के हवाई जहाज के मॉडल के बारे में रजिस्ट्रार ने कहा कि वहां बच्चे अपने बनाए हुए मॉडल्स लेकर गए थे, न कि कोई फाइनल प्रोडक्ट. उन्होंने जोर दिया कि एक गलती की वजह से पूरी यूनिवर्सिटी के तंत्र या बच्चों की प्रतिभा को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए.
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