उत्तर प्रदेश विधानसभा (सदन) में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए ऐसा बयान दे दिया जो अब हंगामा मचा रहा है. उन्होंने निषाद समाज के नेताओं की हत्याओं और माफिया राज को लेकर गंभीर आरोप लगाए. संजय निषाद ने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने निषाद समाज के उभरते हुए नेताओं को खत्म कर दिया. उन्होंने फूलन देवी, जमुना निषाद, महेंद्र सिंह राजपूत, धराराम वर्मा और रघुवर दयाल वर्मा जैसे नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि जो भी समाज के लिए आवाज उठाता था, उसे मरवा दिया जाता था.
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बंदूकधारी' माफिया और मछली व्यापार पर कब्जा
उन्होंने गाजीपुर के 'बंदूकधारी' नेताओं (बिना नाम लिए मुख्तार अंसारी की ओर इशारा) पर निशाना साधते हुए कहा कि इटावा से इलाहाबाद तक एक विशेष वर्ग का कब्जा था. संजय निषाद ने बताया कि पहले मछली व्यापार पर माफियाओं का कब्जा था. वे मछुआरों से मछली छीन लेते थे और नाममात्र के पैसे देते थे. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया कि आज प्रदेश से 'मछली माफिया' खत्म हो गए हैं.
रेल आंदोलन और जेल का अनुभव
उन्होंने सदन में नेता प्रतिपक्ष (सपा) पर तंज कसते हुए पूछा, 'क्या कभी जेल गए हो?' उन्होंने याद दिलाया कि 7 जून 2015 को निषाद आरक्षण के लिए किए गए रेल आंदोलन के दौरान उन्हें पुलिस से बचने के लिए महीनों जंगलों, पहाड़ों और नावों में छिपकर रहना पड़ा था. संजय निषाद ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि अब मछुआरों के लिए 10,000 समितियां बनाई जा रही हैं. आरबीआई के नए नियमों के तहत अब मछुआरे बिना किसी गारंटी के अपने आधार कार्ड पर 3 लाख रुपये तक का लोन लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं.
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