उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी और विपक्षी दलों पर बेहद तीखा प्रहार किया. उनके भाषण के दौरान सदन का माहौल काफी गरमा गया. संजय निषाद ने विपक्ष (खासकर सपा) को "मछआरों का मगरमच्छ" करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने मछुआरों के कल्याण के लिए आए बजट का एक रुपया भी जमीन पर नहीं उतारा और सारा पैसा खुद 'खा' गए. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने 70 साल तक निषाद समुदाय को केवल गुमराह किया और उनके हक पर 'डकैती' डाली.
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उर्दू अनुवादक भर्ती को लेकर लगाए ये आरोप
मंत्री ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने मत्स्य विभाग में 'मछुआ' पद को बदलकर 'उर्दू अनुवादक' की भर्ती कर दी थी. उन्होंने सवाल उठाया, क्या निषाद उर्दू पढ़ता है या मछली उर्दू पढ़ती है? संजय निषाद ने बजट 2026-27 को उत्तर प्रदेश के विकास के लिए 'मील का पत्थर' बताया.
उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में मत्स्य विभाग की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 115.5% रही है, जो अन्य विभागों की तुलना में काफी अधिक है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हुए कहा कि यूपी देश का पहला राज्य है जिसने 'मछुआ कल्याण कोष' की स्थापना की और समाज के बच्चों की शिक्षा, बेटियों की शादी और बीमा के लिए बजट आवंटित किया.
उन्होंने त्रेता युग का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे भगवान राम ने निषाद राज को गले लगाया था, वैसे ही कलयुग में मोदी और योगी ने निषाद राज के वंशजों को गले लगाया है. उन्होंने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि वे "मिल्कमैन" बनकर पिछड़ों का हक लूटते रहे और अब जनता उन्हें पहचान चुकी है, इसलिए वे सत्ता से बाहर हैं.
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