Barabanki Health News: तहसील फतेहपुर में आवारा पशुओं के हमलों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) फतेहपुर में कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटने के शिकार 36 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई. बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है, वहीं चिकित्सकों ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी पशु के काटने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है.
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सीएचसी फतेहपुर के अनुसार शुक्रवार को उपचार के लिए पहुंचे 36 मरीजों में 19 लोग कुत्ते, 11 लोग बंदर और 6 लोग बिल्ली के काटने के शिकार थे. इनमें 9 मरीज पहली बार उपचार के लिए आए, जबकि शेष मरीज पहले से चल रहे एंटी रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम के तहत अपनी निर्धारित डोज लगवाने पहुंचे थे. सभी मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक उपचार के साथ एंटी रेबीज वैक्सीन दी गई.
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि कई इलाकों में बंदरों का आतंक भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. स्कूल जाने वाले बच्चों, खेतों में काम करने वाले किसानों, बाजार आने-जाने वाले लोगों और बुजुर्गों पर आए दिन हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं.कई लोग मामूली घाव समझकर इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे संक्रमण और रेबीज का खतरा बढ़ जाता है.
सीएचसी फतेहपुर के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार कौशल ने बताया कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार और टीकाकरण से इससे पूरी तरह बचाव संभव है.उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता, बंदर, बिल्ली या अन्य संदिग्ध पशु काट ले तो सबसे पहले घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते साफ पानी से अच्छी तरह धोएं. इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय परामर्श लें और डॉक्टर द्वारा निर्धारित एंटी रेबीज वैक्सीन की सभी डोज समय पर पूरी कराएं.
उन्होंने लोगों से झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे न रहने तथा बच्चों को आवारा पशुओं से दूर रखने की अपील की. स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से किसी भी पशु के काटने की घटना को हल्के में न लेने और समय पर उपचार कराने की सलाह दी है. साथ ही स्थानीय निकायों से आवारा पशुओं की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की अपेक्षा जताई गई है.
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