Mathura Weather 3 July 2026: बारिश में डूबे भूतेश्वर रेलवे पुल और नया बस स्टैंड अंडरपास, घंटों ठप रहा यातायात

Newzo

• 03:02 PM • 03 Jul 2026

Waterlogging in Mathura: मथुरा में तेज बारिश के बाद भूतेश्वर रेलवे पुल और नया बस स्टैंड अंडरपास जलमग्न हो गए. कई वाहन पानी में फंस गए और यातायात घंटों ठप रहा. कार में फंसे दो लोगों को पुलिस ने सुरक्षित निकाला. जलभराव से नगर निगम के दावों पर फिर सवाल खड़े हो गए.

:बारिश में डूबे भूतेश्वर रेलवे पुल और नया बस स्टैंड अंडरपास, घंटों ठप रहा यातायात

:बारिश में डूबे भूतेश्वर रेलवे पुल और नया बस स्टैंड अंडरपास, घंटों ठप रहा यातायात

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Mathura News: मथुरा-वृंदावन नगर निगम के दावों की एक बार फिर पोल खुल गई. गुरुवार देर शाम हुई तेज बारिश के बाद शहर के भूतेश्वर रेलवे पुल और नए बस स्टैंड अंडरपास के नीचे घुटनों तक पानी भर गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया.

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क्या है पूरा मामला

भारी बारिश के बाद भूतेश्वर अंडरपास और नया बस स्टैंड पुल के नीचे करीब 4-5 फीट तक पानी भर गया. नगर निगम को बैरिकेडिंग लगाकर आवागमन बंद करना पड़ा. कई बाइक, स्कूटी और कारें पानी में फंसकर बंद हो गईं.

नया बस स्टैंड अंडरपास में एक वैगनआर कार पानी में डूब गई. कार में फंसे दो लोगों को यातायात पुलिस के हेड कांस्टेबल कुलदीप ने करीब साढ़े चार फीट पानी में उतरकर बाहर निकाला.बाद में क्रेन से कार को खींचा गया.

हर साल की समस्या, समाधान कागजों में

भूतेश्वर तिराहा और नया बस स्टैंड अंडरपास में हर वर्ष बारिश के मौसम में जलभराव होता है.बीते वर्षों में यह समस्या गंभीर हो गई है.पानी भरने से पूरा शहर चार हिस्सों में बंट जाता है और घंटों यातायात ठप रहता है.श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है.

6 करोड़ की योजना, फिर भी राहत नहीं

नगर निगम ने जलभराव से निपटने के लिए भूतेश्वर से मसानी नाले तक 1800 मीटर लंबी 27 इंच चौड़ी अंडरग्राउंड पाइपलाइन डालने की योजना बनाई है.इस पर 6 करोड़ रुपये खर्च होंगे.टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और काम शुरू भी हो गया है. महापौर विनोद अग्रवाल का दावा है कि काम पूरा होने पर अंडरपास में जलभराव नहीं होगा.

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि काम शुरू होने के बावजूद बारिश में कोई राहत नहीं मिली. स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर बारिश में ऐसी ही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया है.

अफसरों के दावे फेल

नगर निगम के अधिकारियों और मेयर ने जलभराव की समस्या के समाधान के बड़े-बड़े दावे किए थे, मगर जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत नजर आ रही है.साल 2024-2025 में भी कई प्लान बने - 7-7 करोड़ के तीन नाले, फिर 108 करोड़ के दो बड़े नाले - लेकिन कोई योजना धरातल पर नहीं उतरी.

बीमारी का खतरा बढ़ा

जलभराव से गंदगी और संक्रमण का डर सता रहा है.एक घंटे की बारिश में ही शहर जलमग्न हो गया.