Ballia Ganga erosion News: उत्तर प्रदेश के बलिया में गंगा का रौद्र रूप देखकर अच्छे-अच्छो के पसीने छूट रहे है. फेफना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कोटवा नारायनपुर गांव पर विनाश का साया मंडरा रहा है, लेकिन स्थिति को संभालने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, उनका भरोसा सुनेंगे तो आप अपना माथा पकड़ लेंगे. पूर्व मंत्री नारद राय के सामने जब ग्रामीणों की जान पर बने आपदा का सवाल रखा गया तो बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता इंजीनियरिंग का तर्क देने के बजाय जो कहा वह सुनकर हर कोई हैरान रह गया.
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ग्रामीण किस बात से चिंतित हैं?
बलिया के सोहांव विकासखंड के कोठवा- नारायनपुर गांव में गंगा का कटान कहर बनकर टूटने को आतुर है. 30 साल पहले बनी सुरक्षा दीवार अब गंगा की लहरों के आगे घुटने टेक चुकी है. हालत यह है कि अब गंगा का पानी सीधे तटबंध से टकरा रहा है. पूर्व मंत्री ने बताया कि खतरे की जद में मंगला भवानी मंदिर और प्राचीन डाकबंगला है. अगर कटाव नहीं रुका तो लाइफलाइन एनएच-31 का अस्तित्व मिटना तय है, जिससे पूरा करइल क्षेत्र जिला मुख्यालय से कट जाएगा.
इंजीनियर साहब का दैवीय तर्क
जब पूर्व मंत्री नारद राय ग्रामीणों को लेकर डीएम से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराया इसके बाद ग्रामीणों को लेकर बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता संजय मिश्रा के आवासीय कार्यालय पहुंचे और सुरक्षा की गुहार लगाई तो वहां मौजूद हर कोई सन्न रह गया. नारद राय ने कटाव की जानकारी देते हुए गांव को बचाने की गुहार लगाई तो इंजीनियर साहब ने फाइलें देखने या वैज्ञानिक आकलन करने के बजाय बेहद अजीब तर्क दिया. नारद राय ने कहा ब्राम्हण ने कह दिया बाढ़ नही आएगी इस पर अधिशासी अभियंता संजय मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा कि इस बार बाढ़ नहीं आएगी.
अब सवाल यह है कि क्या बलिया की सुरक्षा अब इंजीनियरों के नक्शो पर टिकी है या सिर्फ ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों पर? क्या प्रशासन एक ऐसे संकट का इंतजार कर रहा है जो आने वाले समय मे किसी बड़े हादसे के रूप में सामने आ जाए.
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा दीवार की मरम्मत नहीं हुई और पत्थरों का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में भारी तबाही तय है, कहा जरूरत पड़ी तो चंदा लेकर ग्रामीण अपने गांव को बचाने का प्रयास करेंगे. फिलहाल बलिया के ग्रामीणों की नजरे अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है. क्या प्रशासन इस जुबानी आश्वासन से आगे बढ़कर धरातल पर काम करेगा या फिर कोटवा नारायनपुर के साथ-साथ एनएच- 31 भी गंगा की भेंट चढ़ जाएगा.
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