Ram Mandir Case: राम मंदिर में भक्तों की आस्था से खिलवाड़ और दान के पैसों में हेराफेरी का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर आ गया है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम दान चोरी घोटाले की तह तक जाने के लिए जल्द ही अयोध्या का रुख कर सकती है.
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सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कई बड़े पदाधिकारियों और जिम्मेदार लोगों से इस सिलसिले में सवाल-जवाब हो सकते हैं. लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र में हुए इस घपले ने हर किसी को हैरान कर दिया है. एसआईटी अब दान प्रबंधन प्रणाली से जुड़े एक-एक रिकॉर्ड को खंगालने की तैयारी में है.
एसआईटी की रिपोर्ट और बढ़ता सस्पेंस
लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई में बनी इस एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट 23 जून को ही अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी थी. इसके बाद जांच को पूरा करने के लिए सरकार ने एसआईटी का कार्यकाल 15 दिनों के लिए और बढ़ा दिया था.
सूत्रों की मानें तो एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में पैसे गिनने के दौरान सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है. अब टीम यह पता लगाने में जुटी है कि क्या जानबूझकर की गई लापरवाही की वजह से यह चोरी मुमकिन हो पाई?
बदले जा रहे नियम
इस पूरे विवाद के बाद ट्रस्ट अब दान के पैसों को संभालने के लिए बैंकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रहा है. अभी तक मंदिर के दान पात्रों से निकलने वाला सारा कैश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नया घाट शाखा में जमा होता था, लेकिन अब दूसरे बैंकों के विकल्पों पर भी विचार चल रहा है.
इस गुस्से और बदलाव की वजह ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का वो बयान है, जो उन्होंने एसआईटी के सामने दिया है. उन्होंने सीधे तौर पर एसबीआई पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा,
"एसबीआई कैश-हैंडलिंग के बुनियादी सुरक्षा नियमों को लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहा. पैसे गिनने वाले कर्मचारियों की अनिवार्य तलाशी , बिना जेब वाली यूनिफॉर्म और भारी-भरकम कैश के लिए तय सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया."
8 गिरफ्तार, 80 लाख कैश बरामद
पुलिस इस मामले में अब तक ट्रस्ट के कर्मचारियों समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनके पास से करीब 80 लाख रुपये कैश और कुछ जेवरात भी बरामद हुए हैं.
अब पुलिस और जांच एजेंसियां इन आरोपियों की कुंडली खंगाल रही हैं. आयकर विभाग, बैंकों, तहसील और सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों से आरोपियों की चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों और निवेश की पूरी जानकारी मांगी गई है. जांच इस बात की भी हो रही है कि क्या इन लोगों ने अपने रिश्तेदारों या करीबियों के नाम पर अयोध्या से बाहर बेनामी संपत्तियां खरीदी हैं.
VIP पास पर भी लगा ब्रेक
इस विवाद का असर अब मंदिर के प्रशासनिक कामकाज पर भी दिखने लगा है. पूर्व महासचिव चंपत राय, गोपाल राव और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के पदों से हटने के बाद, उनकी आईडी से जारी होने वाले वीआईपी पासेज को तुरंत प्रभाव से ब्लॉक कर दिया गया है.
फिलहाल, पुलिस ने जेल में बंद दो मुख्य आरोपियों की 7 दिनों की कस्टडी रिमांड मांगी है ताकि कुछ और अहम सुराग और सबूत जुटाए जा सकें. भ्रष्टाचार निवारण अदालत इस अर्जी पर 14 जुलाई को सुनवाई करेगी, जिसके बाद कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है.
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