Amethi Monsoon Crisis: किसानों ने खेत में धान रोप तो दिया, लेकिन अब उसे बचाना मुश्किल हो गया है. जिले में मानसून की बेरुखी से किसान टूट गए हैं. सामान्य से 59% कम बारिश होने से फसल सूखने लगी है और खेतों में दरारें पड़ने लगी है।डीजल पंप चलाने में पैसे अधिक खर्च हो रहे है और आसमान से पानी की एक बूंद भी नहीं गिर रही है. किसानो का कहना है "मेहनत कर दी, अब भगवान ही मालिक है.
ADVERTISEMENT
अमेठी में इस बार धान की रोपाई के बाद किसानों के चेहरे पर खुशी नहीं, चिंता है. खेतों में लगी फसल प्यास से तड़प रही है।मौसम विभाग के आंकड़े भी किसानों का दर्द बयां कर रहे हैं। 1 जून से 30 जुलाई तक जिले में 280 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक सिर्फ 115.9 मिलीमीटर ही दर्ज हुई है. यानी सामान्य से करीब 59 प्रतिशत कम.
बारिश न होने से जिन खेतों में नलकूप या पंप नहीं है वहां धान के पौधे पीले पड़ गए हैं. बढ़वार रुक गई है. किसान किसी तरह डीजल डलवाकर ट्यूबवेल चला रहे हैं. बारिश न होने से किसानो का दर्द छलक छलक रहा है. किसानों का कहना है कि "रोपाई के बाद बस एक-दो बार पानी गिरा. अब हर 4-5 दिन में पंप चलाना पड़ रहा है. डीजल महंगा है, लागत ही नहीं निकल रही. छोटे किसान कहां से करेंगे?" कई किसान बताते हैं कि रोपाई के समय ही बारिश नहीं हुई थी. तब से खर्च ही बढ़ता जा रहा है. अब फसल को जिंदा रखने के लिए बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है. बिजली का बिल, डीजल और मजदूरी ने कमर तोड़ दी है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 10-15 दिन में अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा. पैदावार घटेगी और किसानों को नुकसान होगा. फिलहाल अमेठी का किसान खेत और आसमान दोनों देख रहा है. उसकी एक ही दुआ है कि इंद्र देव मेहरबान हों, वरना इस बार धान के साथ किसान की उम्मीद भी सूख जाएगी.
ADVERTISEMENT











