पीलीभीत के शिक्षा विभाग में एक ऐसा घोटाला सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम की चूलें हिला दी हैं. मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर बीसलपुर के एक कॉलेज में चपरासी के पद पर तैनात इल्हाम उर्र रहमान शम्सी ने अपनी चतुराई और रसूख के दम पर 5 करोड़ रुपये से अधिक का गबन कर डाला. यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है, जिसमें एक मामूली कर्मचारी अधिकारियों का 'राइट हैंड' बनकर विभाग को ही चूना लगाता रहा.
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चपरासी से 'करोड़पति बाबू' तक का सफर
इल्हाम की शुरुआत साल 2014 में हुई, जब नियमों को ताक पर रखकर वह बीसलपुर से पीलीभीत मुख्यालय में तैनात हो गया. सीधा-सादा चेहरा और अधिकारियों की 'जी हुजूरी' करने की आदत ने उसे जल्द ही सबका चहेता बना दिया. रसूख ऐसा बढ़ा कि जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने अपने दफ्तर के ठीक सामने इल्हाम का केबिन खुलवा दिया. किसी को भनक तक नहीं थी कि फाइलों में डूबा रहने वाला यह कर्मचारी सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहा है.
कैसे खुला 5 करोड़ का 'खेला'?
इस घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर ने डीएम ज्ञानेंद्र सिंह को संदिग्ध लेनदेन की जानकारी दी. जांच में पता चला कि इल्हाम की पत्नी अर्शी खातून के खाते में करोड़ों रुपये भेजे जा रहे थे.
- फर्जी शिक्षक कांड: इल्हाम ने अपनी पत्नी को कागजों पर 'शिक्षक' बना रखा था और सरकारी खजाने से उसे फर्जी वेतन भिजवा रहा था.
- 98 ट्रांजेक्शन: जांच में सामने आया कि 12 नवंबर 2024 के बाद से इल्हाम ने 98 बार में अपनी पत्नी के खाते में 1 करोड़ से ज्यादा रकम ट्रांसफर की.
- 53 बैंक खाते: पुलिस तफ्तीश में 53 ऐसे बैंक खाते मिले हैं, जिनके जरिए करीब 5 करोड़ रुपये का हेरफेर किया गया.
तीन पत्नियां और बड़ा निवेश
पुलिस की विवेचना में यह भी खुलासा हुआ कि इल्हाम की तीन पत्नियां हैं और उसने गबन की गई रकम को जिले के बाहर बड़े कारोबारों में निवेश कर रखा था. शक है कि इस काली कमाई का एक हिस्सा विभाग के पुराने अधिकारियों तक भी पहुंचता था. फिलहाल, इल्हाम की पत्नी जेल में है और मुख्य आरोपी इल्हाम ने भी पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद सरेंडर कर दिया है.
अधिकारियों पर भी लटकी तलवार
इस घोटाले की आंच अब शिक्षा विभाग के साथ-साथ जिला कोषागार (Treasury) तक पहुंच गई है. एसपी सुकीर्ति माधव ने बताया कि करीब 5 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि हुई है और सभी संदिग्ध खातों को फ्रीज कर दिया गया है. DIOS राजीव कुमार का कहना है कि जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस साजिश में शामिल होगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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