इटावा रेलवे स्टेशन के पास से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक बर्बर तस्वीर सामने आई है, जहां भीख मांगकर जीवन यापन करने वाले बुजुर्ग देवेंद्र बाबू के साथ दो सफाई कर्मियों ने बेरहमी से मारपीट की. नशे में धुत आरोपियों ने न केवल लाठी-डंडों से बुजुर्ग को पीटा, बल्कि उन्हें बालों से पकड़कर सड़क पर दूर तक घसीटा. यह हृदयविदारक घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया.
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सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होते ही अफवाहों का बाजार गर्म हो गया और लोग इसे अपनी सुविधा अनुसार जातिगत और धार्मिक रंग देने लगे. कई यूजर्स ने बिना सच्चाई जाने इसे साधुओं पर हमला बताया, जिससे माहौल तनावपूर्ण होने लगा. हालांकि, पुलिस जांच में यह साफ हुआ कि यह किसी एजेंडे के तहत नहीं बल्कि आपसी बहस के बाद उपजी एक साधारण इंसान के साथ की गई अमानवीय बर्बरता थी.
प्रशासन ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषी सफाई कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. यह घटना सोशल मीडिया के दौर में 'आधे सच' की भयावहता को उजागर करती है और हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम किसी भी वीडियो को अपने चश्मे से देखने के बजाय उसकी असलियत जानने का धैर्य रखें. फिलहाल बुजुर्ग का उपचार कराया जा रहा है और पुलिस मामले में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है.
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