एक तरह यूपी विधानसभा चुनावों के पहले फेज में 58 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग चल रही है, तो दूसरी तरफ लखीमपुर खीरी केस में आरोपी आशीष मिश्रा के जमानत की खबर आई है. लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को जमानत दे दी है.
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अब इसे लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं कि आखिर ऐन चुनाव के वक्त आशीष मिश्रा को जमानत कैसे मिली. आशीष मिश्रा के वकील सलिल श्रीवास्तव ने यूपी तक को जमानत के पीछे के बिंदुओं के बारे में विस्तार से बताया है.
एडवोकेट सलिल श्रीवास्तव के मुताबिक कोर्ट के सामने उनकी तरफ से यह तथ्य पेश किया गया कि ‘लखीमपुर हिंसा में मारे गए किसी भी किसान की गोली लगने से मौत नहीं हुई. गाड़ी हरिओम मिश्रा चला रहे थे. जब खतरनाक हथियारों से लैस भीड़ ने हमला किया तो हरिओम मिश्रा ने आत्मरक्षा में गाड़ी चलाई.’
वकील के मुताबिक कोर्ट को बताया गया कि आरोपी आशीष मिश्रा गाड़ी नहीं चला रहे थे. ऐसे में ड्राइवर के द्वारा किए गए अपराध के लिए आशीष मिश्रा को जिम्मेदार कैसे बताया जा सकता है. उन्होंने कोर्ट के सामने यह भी तथ्य पेश किया कि ‘पुलिस की तरफ से दाखिल की गई चार्जशीट में सुप्रीम कोर्ट के नामित एसआईटी के अफसरों के दस्तखत नहीं हैं. ऐसे में हम इस चिट्ठी को अवैध मानते हैं.’
आपको बता दें कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष समेत 14 अभियुक्तों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था. एसआईटी ने इस मामले में अदालत से कहा था कि चार किसानों और एक पत्रकार की हत्या की घटना एक ‘‘सोची-समझी साजिश’’ थी. एसआईटी ने दावा किया था कि यह लापरवाही का मामला नहीं था.
अब आशीष मिश्रा की जमानत पर विपक्ष एक बार फिर मोदी और योगी सरकार पर हमलावर हो गया है. आरएलडी चीफ जयंत चौधरी ने ट्वीट करते हुए कहा है कि, ‘क्या व्यवस्था है! चार किसानों को रौंदा, चार महीनों में ज़मानत…’. वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक चुनावी रैली में कहा है कि ‘किसानों का नरसंहार करने वाले के पिता से प्रधानमंत्री ने इस्तीफा क्यों नहीं लिया? छह किसानों को कुचलने वाले को आज जमानत मिल गई. अब वो खुलेआम घूमेगा.’
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