Om Prakash Rajbhar Statement: उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर बड़ा बयान सामने आया है. यूपी तक के एक कार्यक्रम में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कई अहम सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी. इस दौरान नीट पेपर लीक विवाद, लेखपाल भर्ती आंदोलन और 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर उनसे तीखे सवाल पूछे गए. उनके जवाब अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गए हैं.
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नीट पेपर लीक पर क्या बोले ओम प्रकाश राजभर?
कार्यक्रम के दौरान जब नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल पूछा गया तो ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि इस मामले में पहले ही प्रधानमंत्री स्तर पर हस्तक्षेप हो चुका है. उन्होंने कहा कि जब खुद प्रधानमंत्री ने जिम्मेदारी ले ली है, तो अब इस पर अलग से टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को हटाया है और आगे की जिम्मेदारी भी केंद्र स्तर पर देखी जा रही है.
भर्ती परीक्षाओं में विवाद और छात्रों का आंदोलन
राजभर ने यह भी स्वीकार किया कि यूपी में कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद चल रहा है. लेखपाल भर्ती और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक छात्रों का विरोध जारी है. 29 मई को कैंडल मार्च और 31 मई को कुछ कोचिंग संस्थानों पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई का भी उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से जिक्र किया. उन्होंने कहा कि विभिन्न भर्तियों और परीक्षाओं को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया चल रही है.
69,000 शिक्षक भर्ती और आरक्षण विवाद पर बयान
सबसे ज्यादा चर्चा 69,000 शिक्षक भर्ती को लेकर हुए सवाल-जवाब की रही. अभ्यर्थियों का आरोप है कि आरक्षण व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है और इस मुद्दे पर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है.
इस पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि इस भर्ती से जुड़ा मामला पहले ही कई यूनियनों और अधिकारियों के बीच बातचीत का विषय रहा है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ इस पर कई बार चर्चा हुई है और सभी पक्षों को बात करने का मौका दिया गया था, लेकिन बाद में मामला न्यायालय में चला गया.
सुप्रीम कोर्ट और कानूनी प्रक्रिया का जिक्र
उन्होंने कहा कि मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और इस पर सरकार या कोई भी राजनीतिक व्यक्ति सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मामला अदालत में है, तो अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा.
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन जब मामला कोर्ट में पहुंच जाता है तो सभी को कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए.
राजनीतिक सवालों पर जवाब
कार्यक्रम के दौरान उनसे यह भी पूछा गया कि वह अखिलेश यादव जैसे नेताओं के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन शिक्षा और भर्ती विवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर कम बोलते हैं.
इस पर उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है और कई मामलों में निर्णय प्रक्रिया और कानूनी बाध्यताएं होती हैं, जिनके कारण सीधे प्रतिक्रिया देना संभव नहीं होता.
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