Prayagraj Coaching Centers Sealed: प्रयागराज में पीडीए (प्रयागराज विकास प्राधिकरण) द्वारा मानकों के खिलाफ चल रहे कोचिंग संस्थानों पर की गई कार्रवाई के बाद हालात गरमा गए हैं. इसी बीच एक कोचिंग शिक्षक मारूफ सर चर्चा में आ गए हैं, जिनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें ग्लूकोज चढ़ाने की नौबत आ गई. वह लगातार बच्चों की पढ़ाई और आने वाली परीक्षाओं को लेकर सक्रिय थे और कोचिंग बंद होने के बाद भी मॉक टेस्ट और स्टडी मैटेरियल बांटने में जुटे हुए थे.
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कोचिंग कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव
हाल ही में प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने उन कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई की थी जो मानकों के अनुसार नहीं चल रहे थे. इस कार्रवाई के बाद कई शिक्षक और छात्र प्रभावित हुए. इसी बीच मारूफ सर, जो छात्रों को लगातार पढ़ाई के लिए प्रेरित कर रहे थे, उनकी तबीयत खराब हो गई. बताया जा रहा है कि वह लगातार धूप में दौड़कर अलग-अलग जगह जाकर छात्रों के लिए मॉक टेस्ट और आंसर शीट उपलब्ध करवा रहे थे.
तबीयत बिगड़ी पर अस्पताल में चढ़ा ग्लूकोज
मारूफ सर की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें आराम की सलाह दी गई और डॉक्टरों ने उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया. उनके मुताबिक उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह लगातार धूप में दौड़ना, बच्चों का तनाव और कोचिंग बंद होने के बाद बढ़ा हुआ दबाव है. हालांकि, कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या वह सोशल मीडिया या स्थिति को हाईलाइट करने के लिए ऐसा कर रहे हैं लेकिन मारूफ सर ने इस बात से इनकार किया है.
क्या बोले मारूफ सर?
मारूफ सर ने कहा कि उनकी तबीयत बिगड़ने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं. पहला लगातार धूप में लाइब्रेरी और कोचिंग से जुड़े काम करना, दूसरा बच्चों के एग्जाम का दबाव और तीसरा कोचिंग बंद होने से उपजी समस्या, जिससे कई लोगों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि बच्चों के मैसेज लगातार आ रहे हैं कि मॉक टेस्ट करवाए जाएं और इसी वजह से वह खुद जाकर अलग-अलग लाइब्रेरी में टेस्ट करवा रहे हैं.
बच्चों के भविष्य को बताया सबसे अहम
मारूफ सर ने साफ कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा बच्चों का भविष्य है. उनका कहना है कि 8, 9 और 10 जून को छात्रों के एग्जाम हैं और इसी वजह से वह लगातार काम कर रहे हैं ताकि किसी भी छात्र को परेशानी न हो. उन्होंने कहा कि कोचिंग बंद होने के बाद काम और बढ़ गया है क्योंकि अब उन्हें खुद अलग-अलग जगह जाकर छात्रों को पढ़ाई से जुड़ी सामग्री उपलब्ध करानी पड़ रही है.
सोशल मीडिया पर भी उठा सवाल
इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है. कुछ लोग इसे वास्तविक स्वास्थ्य समस्या बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह स्थिति जानबूझकर हाईलाइट की जा रही है. मारूफ सर ने इस पर कहा कि वह पहले से ही सोशल मीडिया पर जाने-पहचाने हैं और उन्हें अलग से हाईलाइट होने की जरूरत नहीं है.
डॉक्टरों ने बताई वजह
डॉक्टरों के अनुसार उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह डिहाइड्रेशन और गर्मी है. लगातार धूप में काम करने से शरीर में पानी की कमी हो गई, जिससे उन्हें ग्लूकोज देना पड़ा.
कोचिंग बंद होने से बढ़ा दबाव
मारूफ सर ने कहा कि पहले वह कोचिंग में 12-13 घंटे पढ़ाते थे लेकिन अब कोचिंग बंद होने के बाद उन्हें अलग-अलग जगह जाकर बच्चों के लिए काम करना पड़ रहा है. इससे उनका शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ गया है. उन्होंने यह भी कहा कि वह 11 साल से लगातार पढ़ा रहे हैं और लगभग हर दिन छात्रों के बीच रहते हैं.
मारूफ सर ने कहा कि चाहे उनकी तबीयत कैसी भी हो वह बच्चों के लिए काम करते रहेंगे. उनके मुताबिक बच्चों का भविष्य उनके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और वह किसी भी हालत में उन्हें पढ़ाई से वंचित नहीं होने देंगे.
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