उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक के सभी शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच होगी. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी और एसटीएफ को इस संबंध में आदेश दिया है. यह कदम फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने के मामले सामने आने के बाद उठाया गया है. कोर्ट ने एसटीएफ को जांच की पूरी प्रक्रिया तैयार करने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया है.
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सभी शिक्षकों को देना होगा हलफनामा
हाई कोर्ट ने सभी शिक्षकों के लिए नोटरी से सत्यापित हलफनामा देना अनिवार्य किया है. इसमें शिक्षकों को अपने रिश्तेदारों की जानकारी भी देनी होगी. कोर्ट ने कहा है कि पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी शिक्षा निदेशक करेंगे. जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मदद भी ली जा सकती है.
16 अक्टूबर को दिए गए आदेश में कोर्ट ने जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को चेतावनी दी है. ऐसे अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी. मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी. इस दौरान जांच की प्रगति पर विचार किया जाएगा.
शिक्षक की याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई कुसुमलता नाम की एक शिक्षक की याचिका के बाद शुरू हुई. इस मामले में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने के कई मामले सामने आए. इसके बाद हाई कोर्ट ने शिक्षकों के नियुक्ति पत्रों और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच के निर्देश दिए.
स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या पर भी चिंता
हाई कोर्ट ने प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की संख्या घटने और शिक्षा की गुणवत्ता कम होने पर भी चिंता जताई है. इस जांच का उद्देश्य शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच सख्त करना है, ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके.
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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