कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि पंचायत चुनावों के आयोजन में चुनाव आयोग की प्रक्रिया और कोर्ट का फैसला सबसे महत्वपूर्ण होगा. उन्होंने साफ कहा कि सरकार फिलहाल चुनाव कराने को लेकर बहुत उत्साहित नहीं दिख रही है. अगर कोर्ट चुनाव कराने के पक्ष में निर्णय देता है, तभी इसे कराया जाएगा अन्यथा ये चुनाव स्थगित हो सकते हैं. मुख्यमंत्री भी इस मामले में पूरी तरह कोर्ट के निर्णय पर निर्भर हैं और फिलहाल कोई स्पष्ट बयान नहीं दे रहे हैं.
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बगावत के डर से सतर्क हैं राजनीतिक दल
सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक पार्टियां इस समय पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं. पार्टियों को डर है कि स्थानीय स्तर पर होने वाले इन चुनावों के कारण उनके भीतर अंदरूनी मतभेद और बगावती सुर पैदा हो सकते हैं. टिकट बंटवारे और स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई 2027 के बड़े लक्ष्य को प्रभावित कर सकती है. यही कारण है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही फिलहाल इस मुद्दे पर खामोश रहकर चुनाव टलवाना ही बेहतर समझ रहे हैं.
2027 की तैयारी: जेवर एयरपोर्ट बनाम बिरादरी रैली
जहां पंचायत चुनाव ठंडे बस्ते में जाते दिख रहे हैं, वहीं 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है.
बीजेपी जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास का बड़ा संदेश देने की तैयारी में है. समाजवादी पार्टी दादरी में 'बिरादरी रैली' के माध्यम से अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने और प्रभाव बढ़ाने में जुटी है. वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह साफ है कि सभी दलों का पूरा ध्यान अब सीधे विधानसभा चुनावों पर है, जिससे पंचायत चुनाव अब लंबी अवधि के लिए टलते नजर आ रहे हैं.
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