पंचायत चुनाव पर सस्पेंस अभी भी बरकरार, मंत्री ओमप्रकाश राजभर कर रहे हैं ये दावा

आज का यूपी: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर अभी भ्रम जारी है. मंत्री चुनाव की पुष्टि कर रहे हैं लेकिन आयोग नहीं बना है.। एक मौलाना ने विवादित बयान देकर माहौल गरमाया है.

यूपी तक

• 10:07 AM • 10 Mar 2026

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यूपी की राजनीति में इस वक्त भ्रम और आक्रोश का माहौल है. एक तरफ पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर दावा कर रहे हैं कि पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे. वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही इशारा कर रही है. दूसरी तरफ मौलाना अब्दुल्ला सलीम उर्फ 'सलीम चतुर्वेदी' के एक विवादित बयान ने प्रदेश का माहौल गरमा दिया है जिसके खिलाफ अब तक 83 एफआईआर (FIR) दर्ज हो चुकी हैं.

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पंचायत चुनाव: राजभर का दावा बनाम जमीनी हकीकत

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने ऐलान किया है कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे और 15 अप्रैल तक वोटर लिस्ट का प्रकाशन कर दिया जाएगा. पेंच कहाँ है? मई 2026 में ग्राम प्रधानों और बीडीसी का कार्यकाल खत्म हो रहा है.नियमानुसार चुनाव इससे पहले होने चाहिए.चुनाव के लिए जरूरी 'ओबीसी आयोग' का गठन अभी तक नहीं हुआ है, जो आरक्षण का रोस्टर तय करता है. बिना आयोग की रिपोर्ट के चुनाव कराना कानूनी रूप से मुश्किल है.माना जा रहा है कि सरकार विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले कार्यकर्ताओं की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती इसलिए चुनावों को टाला भी जा सकता है.

कौन है विवादित मौलाना अब्दुल्ला सलीम?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां पर अभद्र टिप्पणी करने वाले मौलाना का नाम अब्दुल्ला सलीम है, जो खुद को 'सलीम चतुर्वेदी' कहता है. यह मौलाना देवबंद का पढ़ा हुआ है और बिहार, बंगाल व झारखंड के सीमांचल इलाकों में काफी सक्रिय है. यह चारों वेदों का ज्ञाता होने का दावा करता है, इसलिए अपने नाम के आगे 'चतुर्वेदी' लगाता है. मौलाना ने ओवैसी की पार्टी (AIMIM) से चुनाव लड़ने की कोशिश की थी और बाद में प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' पार्टी में भी शामिल हुआ. इसके आपत्तिजनक बयान के बाद पूरे यूपी में प्रदर्शन हो रहे हैं। हिंदू संगठनों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है.

यूपी में बढ़ा आक्रोश, 83 एफआईआर दर्ज

मौलाना के बयान के बाद उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में तहरीरें दी गई हैं. अब तक कुल 83 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. देवबंद से लेकर लखनऊ तक इस बयान की निंदा हो रही है. संत समाज और हिंदू संगठनों ने इसे सनातनी आस्था और एक मुख्यमंत्री की गरिमा पर सीधा हमला बताया है.