Rajkumar Bhati: समाजवादी पार्टी के तेजतर्रार प्रवक्ता राजकुमार भाटी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं. दशहरे के दिन दिल्ली में आयोजित 'भारतीय बौद्ध महासभा' के एक कार्यक्रम का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में भाटी ऐसी प्रतिज्ञा लेते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसमें भगवान राम, कृष्ण, ब्रह्मा, विष्णु और महेश जैसे हिंदू देवी-देवताओं को न मानने की बात शामिल है. इस वीडियो के सामने आते ही यूपी की सियासत में भूचाल आ गया है और धर्म से लेकर राजनीति तक बहस छिड़ गई है. विरोधी दलों ने सपा पर हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसके बाद खुद राजकुमार भाटी को सामने आकर अपनी सफाई देनी पड़ी है.
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राजकुमार भाटी ने दी अपनी सफाई
वीडियो पर बवाल मचने के बाद राजकुमार भाटी ने अपना स्पष्टीकरण दिया है. उन्होंने कहा कि वह इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे और एक राजनीतिक कार्यकर्ता होने के नाते वह सभी धर्मों के कार्यक्रमों में जाते हैं. उन्होंने धर्म परिवर्तन की बात को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि वह आज भी हिंदू हैं और उनका धर्म बदलने का कोई इरादा नहीं है. भाटी ने इस पूरे विवाद को बीजेपी आईटी सेल का झूठा प्रचार बताया है.
बीजेपी ने सपा पर साधा निशाना
भाटी के वायरल वीडियो पर बीजेपी ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है. विरोधियों का आरोप है कि सपा एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपने नेताओं से सनातन धर्म और हिंदू भावनाओं का अपमान करवाती है. उनका कहना है कि पार्टी मजहबी तुष्टिकरण में इतनी डूब गई है कि जानबूझकर ऐसे बयान दिलवाए जाते हैं. विरोधियों ने सवाल उठाया है कि क्या समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में हिंदुओं का वोट नहीं चाहिए?
क्या है बाइस प्रतिज्ञाओं का इतिहास?
इस कार्यक्रम में जो 22 प्रतिज्ञाएं ली गईं, उनका एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक महत्व है. दरअसल, 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षाभूमि में डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था. उसी दौरान उन्होंने सामाजिक असमानता, छुआछूत और पाखंड के खिलाफ अपने अनुयायियों को 22 प्रतिज्ञाएं दिलाई थीं, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं को ईश्वर न मानने की बात शामिल थी. गौरतलब है कि राजकुमार भाटी इससे पहले मई महीने में भी ब्राह्मण समाज पर की गई एक टिप्पणी को लेकर विवादों में रह चुके हैं.
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