SP Leader Ram Govind Chaudhary Death: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष और आठ बार के विधायक रहे रामगोविंद चौधरी का 73 साल की उम्र में निधन हो गया है. रामगोविंद चौधरी पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे और 25 सितंबर की रात करीब सवा 5 बजे लखनऊ के एसजीपीजीआई (SGPGI) अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से समाजवादी पार्टी सहित पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कई बार अस्पताल जाकर उनका हालचाल भी ले चुके थे. रामगोविंद चौधरी के निधन पर अखिलेश यादव के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के कई नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है.
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बलिया से शुरू हुआ छात्र राजनीति का सफर
रामगोविंद चौधरी का जन्म 7 सितंबर 1953 को बलिया जिले के गोसाईंपुर गांव में हुआ था. बलिया की माटी से निकले इस समाजवादी योद्धा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी. उनका सफर इतना लंबा और मजबूत रहा कि उन्होंने आठ बार विधायक का चुनाव जीता. जब वह सदन में अपनी बात रखते थे, तो उनके आंकड़े, उदाहरण और व्यंग्य सुनने के लिए हर कोई शांत होकर बैठ जाता था. बलिया में उनकी राजनीतिक पकड़ इतनी मजबूत थी कि वहां बीजेपी को अपना खाता खोलने और कमल खिलाने में सालों लग गए. 2022 में बीजेपी वहां पहली बार जीत दर्ज कर पाई.
लगातार जीते चुनाव, मुलायम और अखिलेश सरकार में रहे मंत्री
रामगोविंद चौधरी ने पहली बार साल 1977 में विधानसभा का चुनाव जीता था. इसके बाद उन्होंने 1980, 1985, 1990 और 1991 के चुनावों में भी लगातार जीत दर्ज की. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में वह बलिया की बांसडीह सीट से जीतकर विधायक बने. रामगोविंद चौधरी एक इतने कद्दावर नेता थे कि उन्हें मुलायम सिंह यादव की सरकार के साथ-साथ अखिलेश यादव की सरकार में भी महत्वपूर्ण विभागों का मंत्री बनाया गया था. उनका राजनीतिक अनुभव केवल सरकार में ही नहीं, बल्कि संगठन और विधानसभा की कार्यवाहियों में भी बखूबी इस्तेमाल हुआ.
2017 में बने नेता प्रतिपक्ष, 2022 में मिली थी हार
साल 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद जब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, तब समाजवादी पार्टी ने रामगोविंद चौधरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की अहम जिम्मेदारी सौंपी थी. हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस चुनाव में वह बांसडीह सीट से फिर से सपा प्रत्याशी के तौर पर मैदान में थे, लेकिन उन्हें बीजेपी-निषाद पार्टी गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह ने हरा दिया था. निधन से कुछ दिन पहले जब अखिलेश यादव उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे, तो उन्होंने कहा था कि चुनाव जीतना है और अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है. उनके इस जज्बे और एक लंबी राजनीतिक पारी का अब दुखद अंत हो गया है.
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