उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक और चर्चित सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है. मेरठ कोर्ट ने अमित कश्यप हत्याकांड में दोषी पाई गई महिला रविता और उसके सहयोगी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है. अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि दोषियों ने पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते और भारतीय समाज के महत्वपूर्ण मूल्यों को कलंकित किया है, इसलिए ऐसे अपराध के लिए नरमी नहीं बरती जा सकती.
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कोर्ट का कड़ा रुख और सावित्री देवी के आदर्शों का हवाला
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने दोषियों के लिए कड़े से कड़े दंड की मांग की थी. फैसला सुनाते हुए जज ने भारतीय संस्कृति, समाज की मर्यादा और नारी सम्मान का हवाला दिया. अदालत ने सावित्री देवी के आदर्शों का उदाहरण देते हुए कहा कि पति-पत्नी के रिश्ते की गरिमा और समाज की नैतिक नींव की रक्षा के लिए ऐसे जघन्य अपराधियों को मृत्युदंड देना ही न्यायसंगत है. अदालत ने दोषियों के बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के संबंध में भी आवश्यक आदेश जारी किए हैं.
अमित की मां का दर्द और कोर्ट रूम का माहौल
फैसला आने के बाद मृतक अमित कश्यप के परिवार को न्याय तो मिला, लेकिन उनका दर्द अब भी झलकता है. अमित की मां ने रोते हुए कहा कि जिस तरह उनके बेटे ने तड़प-तड़प कर जान दी, दोषियों को भी वैसी ही सजा मिलनी चाहिए. भारी पुलिस सुरक्षा और खचाखच भरे कोर्ट रूम के बीच जब यह फैसला सुनाया गया, तो रविता और अमरदीप ने इसे स्वीकार करने का आश्वासन दिया, जो उनकी दोषसिद्धि की पुष्टि करता है.
सौरभ राजपूत हत्याकांड के बाद मेरठ का दूसरा बड़ा फैसला
मेरठ में हाल ही में सामने आए 'सौरभ राजपूत (नीला ड्रम) हत्याकांड' की तरह ही इस मामले में भी अदालत ने रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है. इस ऐतिहासिक फैसले से एक बार फिर यह संदेश गया है कि न्यायपालिका जघन्य अपराधों और रिश्तों को तार-तार करने वालों के खिलाफ पूरी तरह सख्त रुख अपना रही है.
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