उत्तर प्रदेश की नरेनी विधानसभा चुनावी दृष्टिकोण से चर्चा में रहती है. यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से मध्यप्रदेश के बॉर्डर पर है. यह सीट भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जाती है. पिछली बार यह सीट मात्र 5000 वोटों के अंतर से भाजपा को मिली. यहां दलित मतदाताओं का प्रभाव बहुत अधिक रहता है, जिसके कारण बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस क्षेत्र में लंबे समय तक जीत दर्ज की है. लेकिन अब सपा इस क्षेत्र में मजबूत होती दिख रही है, जिससे आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और सपा के बीच कड़ी टक्कर की उम्मीद है.
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नरेनी विधानसभा में प्रमुख जातीय समूहों में ब्राह्मण, दलित, यादव, कुशवाहा, मुस्लिम और क्षत्रिय शामिल हैं. यहां की जनसंख्या में ब्राह्मण और दलित लगभग बराबर संख्या में हैं, जिससे वोट बैंक का समीकरण जटिल हो जाता है. वर्तमान विधायक ओम मणि वर्मा भाजपा के हैं. भाजपा का दावा है कि उनकी सरकार में महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा बेहतर हुई है, जो उन्हें आगामी चुनाव में फायदा देगा.
वहीं, समाजवादी पार्टी का मानना है कि लोकसभा चुनावों में मिली सफलता के बाद वे विधानसभा चुनाव में भी अच्छे नतीजे लाएगी. इस बार चुनाव में प्रमुख मुकाबला भाजपा और सपा के बीच होने की उम्मीद जताई जा रही है, और वरिष्ठ पत्रकार भी इस बात पर सहमत हैं कि 2027 का चुनाव पिछले चुनाव से बहुत अलग माहौल में होगा.
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