अतीक अहमद पर किताब लिखने वाले मनोज राजन त्रिपाठी ने धुरंधर 2 मूवी की पोल ही खोल दी!

Dhurandhar 2 Movie Review Atiq Ahmed: फिल्म 'धुरंधर 2' में अतीक अहमद जैसे किरदार को ISI एजेंट दिखाए जाने पर मनोज राजन त्रिपाठी ने उठाए सवाल. क्या वाकई अतीक के थे पाकिस्तान से तार? देखिए 'कसारी मसारी' के लेखक के साथ यह विशेष चर्चा.

यूपी तक

• 12:14 PM • 21 Mar 2026

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हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'धुरंधर 2' में पूर्व सांसद और माफिया डॉन अतीक अहमद से मिलते-जुलते किरदार 'आतिफ अहमद' को दिखाए जाने पर विवाद छिड़ गया है. वरिष्ठ पत्रकार और 'कसारी मसारी' (अतीक अहमद पर आधारित पुस्तक) के लेखक मनोज राजन त्रिपाठी ने इस फिल्म में दिखाए गए तथ्यों और वास्तविक अतीक अहमद के बीच के अंतर पर विस्तार से चर्चा की है. मनोज राजन त्रिपाठी के अनुसार, फिल्म में किरदार का नाम भले ही 'आतिफ अहमद' है, लेकिन उसकी कद-काठी, पहनावा, बोलने का लहजा और इलाहाबाद (प्रयागराज) का बैकग्राउंड पूरी तरह से अतीक अहमद की नकल है. 

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फिल्म में इस किरदार को ISI एजेंट, हथियारों का बड़ा तस्कर और नोटबंदी के दौरान ₹500 करोड़ की हेराफेरी से जुड़ा दिखाया गया है. मनोज राजन त्रिपाठी का कहना है कि अतीक अहमद के खिलाफ लगभग पौने 200 मुकदमे थे, लेकिन कभी भी किसी पुलिस रिपोर्ट या FIR में उसके ISI एजेंट होने या ड्रग्स तस्करी (विशेषकर पंजाब में) में शामिल होने की बात सामने नहीं आई. उन्होंने तर्क दिया कि यदि अतीक के संबंध ISI से होते, तो उसकी क्रॉस-बॉर्डर कॉलिंग IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) या RAW के रडार पर जरूर आती, क्योंकि ऐसी हर कॉल स्कैन की जाती है.

'फिल्मी लिबर्टी' या 'प्रोपेगेंडा'?

मनोज राजन त्रिपाठी  के मुताबिक, फिल्म निर्माता अक्सर 'डिस्क्लेमर' का सहारा लेकर 'फिल्मी लिबर्टी' (रचनात्मक स्वतंत्रता) लेते हैं ताकि कहानी को रोमांचक बनाया जा सके और पैसा कमाया जा सके. अतीक अहमद का मर्डर जिस 'ग्रेंजर' (बड़े स्तर) और तरीके से हुआ, वह किसी भी फिल्म निर्माता के लिए एक महत्वपूर्ण विषय हो सकता है. फिल्म में अतीक के किरदार को ISI और दाऊद इब्राहिम से जोड़ना व्यावसायिक लाभ और "दिल्ली-यूपी टेरिटरी" में फिल्म को हिट कराने का एक तरीका हो सकता है. 

अतीक अहमद का मर्डर और 'कसारी मसारी'

मनोज राजन त्रिपाठी ने अपनी पुस्तक 'कसारी मसारी' में अतीक अहमद के मर्डर की पूरी प्लानिंग, जिगाना पिस्तौल का आना और लॉरेंस बिश्नोई गैंग की संभावित भूमिका का जिक्र किया है. उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि पुलिस हिरासत में हत्यारों पर कोई जवाबी कार्रवाई (हाफ एनकाउंटर भी नहीं) क्यों नहीं की गई.