पाल और दलित तय करेंगे कानपुर देहात की सिकंदरा सीट का भाग्य... BJP बचा पाएगी अपना तीन चुनावों का अजेय किला?

कानपुर देहात की सिकंदरा सीट पर भाजपा का दबदबा माना जाता है. क्या सपा का 'PDA' फॉर्मूला और पाल वोटर्स बदलेंगे चुनावी समीकरण? जानें इस सीट का पूरा जातीय गणित और राजनीतिक इतिहास.

यूपी तक

• 12:28 PM • 20 Mar 2026

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कानपुर देहात की सिकंदरा सीट पर भाजपा की पकड़ मजबूत मानी जाती है. पाल वोटर्स इस विधानसभा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. भाजपा पिछले तीन चुनावों से यहां जीत रही है.

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सिकंदरा सीट पर दलित, ब्राह्मण, छत्रिये, ओबीसी और मुसलमान मतदाता हैं. मगर यहां पाल और दलित वोटर ज्यादा निर्णायक माने जाते हैं. 2017 में भाजपा ने मजबूत चुनाव अभियान चलाया था. समाजवादी पार्टी के लिए यह सीट महत्वपूर्ण है. सपा यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. 

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि पिछली बार भाजपा ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया था. लेकिन इस बार सपा का पीडीए फॉर्मूला यहां गेम चेंज कर सकता है. यह क्षेत्र जातीय समीकरण के कारण राजनीति में हमेशा चर्चित रहा है. 

भाजपा के जिला अध्यक्ष का मानना है कि विकास कार्यों के आधार पर पार्टी कानपुर देहात में सभी सीटें जीत सकती है. वहीं समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के युवा, किसान और दलित समाज से समर्थन जुटाकर जोर आजमा रही है. आगामी चुनाव इस क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर बदल सकते हैं.