पूर्वांचल के कई जिलों, विशेषकर प्रयागराज और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में एलपीजी गैस सिलेंडर की भारी किल्लत और अफरातफरी का माहौल देखने को मिल रहा है. हालांकि प्रशासन और सरकार आपूर्ति सामान्य होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.
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रिपोर्ट के अनुसार, इस किल्लत के पीछे ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव को बताया जा रहा है. स्ट्रीट ऑफ हॉर्मुज एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है जहां से दुनिया के पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा हिस्सा गुजरता है. इस इलाके में तनाव और ईरान की गतिविधियों के कारण पेट्रोलियम उत्पादों के आयात-निर्यात पर असर पड़ा है, जिससे एलपीजी की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है.
जमीनी हालात: प्रयागराज से रिपोर्ट
लोग सुबह 4:00 बजे से ही गैस एजेंसी की गाड़ियों का इंतजार करने के लिए लाइन में लग रहे हैं. कई लोग जो रोजा रखे हुए हैं, वे भी चिलचिलाती धूप में घंटों लाइन में खड़े होने को मजबूर हैं ताकि उनके घर में शाम का खाना बन सके. सिलेंडर चोरी होने के डर से लोग उन पर अपना नाम लिख रहे हैं और कुछ जगहों पर तो लोग सिलेंडर को जंजीरों से बांधकर लाइन में लगे हुए देखे गए हैं.
एक गैस वितरण गाड़ी में आमतौर पर केवल 120 सिलेंडर होते हैं, जबकि लाइन में 200 से 250 से भी अधिक लोग खड़े रहते हैं. इस कारण कई लोगों को दिन भर इंतजार के बाद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. घरेलू गैस के साथ-साथ कमर्शियल गैस की सप्लाई भी काफी हद तक प्रभावित हुई है.
वहीं प्रशासन का आधिकारिक दावा है कि जिले में एलपीजी की कोई वास्तविक कमी नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि कमी की अफवाहों के कारण लोगों में 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) बढ़ गई है, जिससे अचानक मांग में उछाल आया है.
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