पिछले 18 सालों से ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ा है हरीश राणा का परिवार, पूरी कहानी सामने आई

इच्छा मृत्यु की अनुमति पाने वाले हरीश राणा के परिवार का ब्रह्माकुमारी संस्था से 18 वर्षों का नाता. राजयोग मेडिटेशन और पारिवारिक एकजुटता ने दी बेटे के संघर्ष में मानसिक शक्ति.

यूपी तक

• 03:43 PM • 19 Mar 2026

follow google news

सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की इजाजत पाने वाले हरीश राणा की कहानी सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि अटूट पारिवारिक एकजुटता और आध्यात्मिक विश्वास की भी दास्तां है. पिछले कई वर्षों से हरीश का परिवार 'ब्रह्माकुमारी' संस्था से जुड़ा हुआ है, जिसने उन्हें जीवन के इन सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण क्षणों में मानसिक संबल और सकारात्मकता प्रदान की है.

यह भी पढ़ें...

18 वर्षों का आध्यात्मिक सफर

हरीश राणा का परिवार पिछले 18 सालों से ब्रह्माकुमारी संस्था से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है. हरीश के पिता, अशोक राणा, नियमित रूप से संस्था की क्लासेस में सम्मिलित होते रहे हैं. यहां बच्चों के लिए आयोजित होने वाले आध्यात्मिक शिक्षा और खेलकूद के कार्यक्रमों ने परिवार के भीतर एक मजबूत नैतिक और आध्यात्मिक नींव तैयार की.  इसी जुड़ाव ने परिवार को विपरीत परिस्थितियों में भी टूटने नहीं दिया और उन्हें एक सूत्र में बांधे रखा. 

संघर्ष के बीच राजयोग और मेडिटेशन का सहारा

मेडिकल बोर्ड की लंबी बैठकें, जटिल कानूनी प्रक्रियाएं और बेटे की संरक्षकता की भारी जिम्मेदारी के बीच परिवार ने कभी अपना धैर्य नहीं खोया. परिवार के सदस्यों ने रोजाना राजयोग मेडिटेशन और संस्था के ज्ञान वचनों का सहारा लिया, जिससे उनमें आत्मिक शक्ति और संयम बना रहा. AIIMS में चल रही लंबी चिकित्सा प्रक्रिया के बावजूद, परिवार ने आध्यात्मिक ध्यान के माध्यम से अपने मनोबल को ऊंचा रखा और नकारात्मकता में भी सकारात्मक रास्ते तलाशे.

परिवार की एकजुटता और भाई का समर्पण

इस कठिन दौर में हरीश के छोटे भाई आशीष ने एक मजबूत स्तंभ की तरह परिवार को संभाला. आशीष ने आर्थिक और मानसिक, दोनों स्तरों पर परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं. परिवार के बीच निरंतर संवाद, प्रेम और आपसी सहयोग ने स्थिति को स्थिर बनाए रखा. ब्रह्माकुमारी संस्था के सदस्यों ने भी इस संघर्ष में परिवार का साथ दिया और उन्हें शांति तथा माफी के संदेश के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.