Galgotias University Students Interview: ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) इन दिनों एआई समिट में 'रोबोटिक डॉग' को लेकर हुए विवाद के कारण चर्चा में है. यूपी Tak की टीम जब यूनिवर्सिटी के बाहर छात्रों से बात करने पहुंची, तो वहां छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. कई छात्रों ने यूनिवर्सिटी का पुरजोर बचाव किया. एक छात्र ने कहा कि यूनिवर्सिटी में 55,000 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं और इतनी भीड़ बिना किसी ठोस कारण के नहीं आती. छात्रों का तर्क है कि 'रोबोटिक डॉग' वाला विवाद मैनेजमेंट और प्रमोशन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इससे छात्रों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ता. एक छात्र ने यह भी कहा कि अगर यूनिवर्सिटी ने बाहर से रोबोट खरीदा भी है, तो वह छात्रों को सिखाने के लिए ही लाया गया है.
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'खाने' और 'टाइम-टेबल' की तारीफ
एक छात्रा ने यूनिवर्सिटी के कैंपस और वहां मिलने वाले खाने की जमकर तारीफ की. उसने बताया कि कैफेटेरिया में पाव भाजी, मोमोज और मसाला डोसा जैसे व्यंजन बहुत अच्छे मिलते हैं. छात्रा ने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी का टाइम-टेबल बहुत सुविधाजनक है, जहां हफ्ते में चार दिन की छुट्टियां मिलती हैं और केवल तीन दिन लंबी क्लासेस चलती हैं.
मीडिया और सोशल मीडिया पर नाराजगी
छात्रों ने नाराजगी जाहिर की कि मीडिया केवल 'नेगेटिव' खबरों को उछाल रहा है. उनका कहना है कि गलगोटिया का 'यूनिफेस्ट' (Unifest) उत्तर भारत में सबसे बड़ा होता है, लेकिन उसे वैसी कवरेज नहीं मिलती. एक छात्र ने मीडिया से सवाल किया कि वे गंभीर अपराधों और पेंडिंग कोर्ट केसेज को छोड़कर इस छोटे से विवाद को इतनी बड़ी हेडलाइन क्यों बना रहे हैं?
प्लेसमेंट और स्किल का मुद्दा
झारखंड से आए एक छात्र ने कहा कि प्लेसमेंट पूरी तरह छात्र की स्किल (कौशल) पर निर्भर करता है. कोई भी यूनिवर्सिटी (चाहे वह IIT ही क्यों न हो) नौकरी की 100% गारंटी नहीं दे सकती अगर छात्र खुद नहीं पढ़ेगा. छात्रों ने गलगोटिया की iOS लैब जैसी आधुनिक सुविधाओं का भी जिक्र किया, जो उनके अनुसार क्षेत्र की अन्य यूनिवर्सिटीज के पास नहीं हैं.
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