लखनऊ में फिनिक्स पलासियो से लेकर इकाना तक जलमग्न, छतों पर रहने को मजबूर लोग, जानें ग्राउंड जीरो का हाल

यूपी तक

08 Oct 2026 (अपडेटेड: 08 Oct 2026, 03:20 PM)

लखनऊ में मूसलाधार बारिश और गोमती नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. शहर के कई इलाकों में जलभराव हुआ है और प्रशासन राहत कार्यों में लगा है.

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मूसलाधार बारिश और उफनती गोमती नदी ने भारी तबाही मचाई है. शहर के निचले इलाकों से लेकर शहीद पथ जैसे सबसे आधुनिक और वीआईपी स्पॉट्स तक सब कुछ जलमग्न हो चुका है. स्थिति इतनी विकराल है कि लखनऊ का मशहूर फिनिक्स पलासियो मॉल, इकाना स्टेडियम और आसपास का पूरा इलाका पानी में डूब गया है. वहीं बाढ़ प्रभावित रिहायशी इलाकों में हालात खौफनाक बने हुए हैं. लोगों के किचन से लेकर बेडरूम तक जलमग्न हैं और परिवार छतों पर शरण लेने के लिए मजबूर हैं. ग्राउंड जीरो पर उम्मीद की एकमात्र किरण राहत सामग्री लेकर पहुंच रही बोट बनी हुई है.

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शहीद पथ और फिनिक्स पलासियो के पास सड़कें बनीं नदियां

लगातार हुई तेज बारिश और पास बह रही गोमती नदी के बढ़े जलस्तर ने शहर के सबसे व्यस्त और हाई-टेक इलाके की रफ्तार रोक दी है. शहीद पथ से जुड़े फिनिक्स पलासियो मॉल के सामने सड़कों पर कई फीट पानी भर चुका है. मॉल के मेन एंट्री-एग्जिट गेट, आसपास बने होटलों और पास ही स्थित इकाना स्टेडियम के पूरे इलाके में भारी वाटर-लॉगिंग हो गई है. सड़कों पर जलभराव के कारण गाड़ियां पानी से होकर गुजर रही हैं और आम लोगों व खरीदारों का मॉल तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया है.

फैजुल्लागंज के बाद अब पॉश इलाकों में घुसा गोमती का पानी

गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से लखनऊ के कई हिस्से जलप्रलय की चपेट में हैं. इससे पहले गोमती का पानी बढ़ने से फैजुल्लागंज इलाके में बाढ़ जैसे हालात बने थे और अब यह पानी शहीद पथ व पलासियो मॉल के आसपास की सड़कों पर आ गया है. डिवाइडर के दोनों तरफ कई फीट पानी भरा होने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

ग्राउंड जीरो के हालात

बाढ़ प्रभावित और निचले इलाकों से सामने आ रही तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं.

घरों के अंदर जलभराव: लोगों के घरों में कई फीट तक पानी घुस गया है, जिससे खाने-पीने का राशन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और फर्नीचर पूरी तरह जलमग्न हो चुका है.

छतों पर रहने की मजबूरी: कमरों में पानी भर जाने के कारण परिवार अपने ही घरों की छतों पर दिन-रात गुजारने को विवश हैं.

नाव ही एकमात्र सहारा: डूबे हुए इलाकों में फंसे लोगों तक भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए नावें ही एकमात्र जरिया बनी हुई हैं.

राहत कार्यों में जुटी मशीनरी, मगर संकट बरकरार

प्रशासनिक मशीनरी मौके पर मुस्तैद है और जेसीबी तथा भारी पंपिंग सेट की मदद से पानी निकालने की कोशिशें की जा रही हैं. हालांकि, गोमती नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण राहत कार्यों में काफी अड़चनें आ रही हैं. प्रशासन भले ही जल निकासी का दावा कर रहा हो लेकिन राजधानी वासियों के सामने बड़ा सवाल यही है कि उन्हें इस जलभराव और तबाही से कब पूरी तरह निजात मिलेगी.