आजमगढ़ में मारे गए महंत महेंद्र पाठक के भाई ने कर दिया बड़ा खुलासा!

यूपी तक

• 02:01 PM • 23 Sep 2026

आजमगढ़ में पूजा के दौरान हुई त्रिपल मर्डर की घटना में चार लोगों की मौत हुई. आरोपी ने मानसिक समस्याओं के कारण फायरिंग की. पुलिस ने बन्धक बच्चों को बचाया। परिवार को आर्थिक मदद की जरूरत है.

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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहिरौला थाना क्षेत्र अंतर्गत शंभूपुर गांव से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक घर में चल रहे 'महामृत्युंजय जाप' के दौरान अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल उठा. मानसिक असंतुलन, अनजाने डर और अंधविश्वास के साये में अरविंद सिंह नामक व्यक्ति ने अपनी ही पत्नी, दो पुश्तैनी पुरोहितों और अंत में अपने ही 8 वर्षीय मासूम बेटे की हत्या कर दी. घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस फोर्स और कमांडो दस्ते ने पूरे घर को घेर लिया. आरोपी द्वारा बच्चों को बंधक बनाकर फायरिंग करने पर पुलिस ने जवाबी कार्रवाई (एनकाउंटर) में आरोपी अरविंद सिंह को ढेर कर दिया. इस खौफनाक मंजर और 5 मौतों के बाद पूरे गांव में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है.

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आधार कार्ड' का बहाना बनाकर चलाई गोली

अहिरौला के शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह की बिगड़ती मानसिक स्थिति और सेहत में सुधार के लिए उसकी पत्नी और मां ने घर में 'महामृत्युंजय जाप' का आयोजन कराया था. पूजा के चौथे दिन जब धार्मिक अनुष्ठान पूरा कर पुरोहित जाने लगे, तब अरविंद ने उनसे पहचान के लिए आधार कार्ड मांगने का अजीब बहाना बनाया. पुरोहितों के पास आधार कार्ड न होने पर उसने विवाद शुरू कर दिया और अपनी भरी हुई पिस्टल निकालकर ताबड़तोड़ अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.

पत्नी ने ढाल बनने की कोशिश की, पुरोहितों को दौड़ाकर मारी गोली

घटना के वक्त मौजूद लोगों के मुताबिक, अरविंद का दिमागी संतुलन पूरी तरह से खो चुका था. गोली चलते ही अरविंद की पत्नी बबीता पुरोहितों के आगे ढाल बनकर खड़ी हो गई. लेकिन पहली गोली उसके सिर में लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इसके बाद अरविंद ने अपने पुश्तैनी पुरोहित महंत महेंद्र पाठक और उनके मौसेरे भाई अखिलेश मिश्रा पर सिर में गोलियां बरसा दीं. अखिलेश का युवा बेटा आयुष किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा.

"पीढ़ियों पुराना संबंध था, फिर भी क्यों मार डाला?"

मारे गए महंत महेंद्र पाठक के बड़े भाई ने रोते हुए इस पूरी त्रासदी की दास्तान सुनाई. उन्होंने बताया कि उनका परिवार अरविंद के दादा-परदादा के समय से उनका पुश्तैनी पुरोहित रहा है. 2018 में जब अरविंद के भाई गुड्डू सिंह की हत्या हुई थी तब भी पुरोहित परिवार ने अपने पास से पैसे लगाकर उनके लिए 'नारायण बलि' (प्रेत शांति) का पाठ कराया था.

महेंद्र पाठक के परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा है. उनके एक बेटे और बेटियों की पढ़ाई-लिखाई तथा गुजर-बसर के लिए पीड़ित परिवार ने सरकार से 10 से 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है.

एनकाउंटर में ढेर हुआ आरोपी

पुरोहितों और पत्नी की हत्या करने के बाद आरोपी अरविंद सिंह ने अपने ही बच्चों को घर के अंदर बंधक बना लिया. सूचना मिलते ही पुलिस और कमांडो टीम ने घर को चारों तरफ से घेर लिया. खुद को घिरता देख अरविंद ने अंदर से ही फायरिंग शुरू कर दी और अपने 8 साल के बेटे शौर्य को गोली मार दी (जिसकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई). इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एनकाउंटर में अरविंद सिंह को मार गिराया.

बताया जा रहा है कि 2018 में भाई की हत्या के बाद से ही अरविंद गंभीर मानसिक तनाव और अंधविश्वास के फेर में था. इस खौफनाक वारदात ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है और पुलिस मामले की आगे की कानूनी जांच कर रही है.