उत्तर प्रदेश की सियासत और अपराध जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर वाराणसी से सामने आई है. करीब 24 साल पुराने बहुचर्चित 'टकसाल सिनेमा शूटआउट' मामले में बुधवार को एमपी/एमएलए कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है. अदालत ने साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए बाहुबली विधायक अभय सिंह समेत सभी शेष आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) करार दिया है. पूर्व सांसद धनंजय सिंह के काफिले पर हुए उस खूनी हमले की कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप दो दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद हुआ है.
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क्या था 24 साल पुराना वो वाकया?
घटना 4 अक्टूबर 2002 की है. जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह शाम के वक्त अपने साथियों के साथ वाराणसी के एक अस्पताल से लौट रहे थे. नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास पहले से घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उनके काफिले को घेर लिया. हमला इतना भीषण था कि एके-47 और अन्य आधुनिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की गई. इस हमले में धनंजय सिंह के बाएं हाथ में गोली लगी थी, जबकि उनके गनर, ड्राइवर और तीन साथी लहूलुहान होकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
अभय सिंह पर था मुख्य आरोप
इस सनसनीखेज कांड में विधायक अभय सिंह को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था. उनके साथ एमएलसी विनीत सिंह सहित सात लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई थी. लंबी चली इस कानूनी जंग में विनीत सिंह और चार अन्य आरोपी पहले ही बरी हो चुके थे. बुधवार को कोर्ट ने मामले के अंतिम तीन आरोपियों, जिनमें अभय सिंह भी शामिल थे, उन्हें भी सबूतों की कमी के चलते क्लीन चिट दे दी.
दलीलों के बीच कोर्ट का फैसला
अदालत में दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई. धनंजय सिंह के वकील ने इसे 'अंधाधुंध फायरिंग' का गंभीर मामला बताते हुए आरोपियों के लिए उम्रकैद की मांग की थी. वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास है और आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं. 15 अप्रैल को आए इस फैसले के बाद जहां अभय सिंह के समर्थकों में उत्साह है, वहीं धनंजय सिंह के खेमे के लिए इसे एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है.
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